- करनाल सिविल अस्पताल के तीसरे तल पर कैंसर डे केयर और कीमोथेरेपी सेंटर की शुरुआत।
- 6 बेड का विशेष वार्ड स्थापित; गंभीर रोगियों के लिए ₹3000 मासिक पेंशन की भी सुविधा।
- अंबाला के अटल कैंसर केंद्र से संबद्ध; एम्स में प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा किया जाएगा इलाज।
करनाल जिले और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी राहत की खबर सामने आई है। अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों को कीमोथेरेपी जैसे जटिल और महंगे उपचार के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। करनाल के जिला नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) के तीसरे तल पर एक अत्याधुनिक कैंसर डे केयर सेंटर और कीमोथेरेपी वार्ड की स्थापना की गई है। इस नई सुविधा से न केवल मरीजों के समय की बचत होगी, बल्कि उन पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस विशेष वार्ड को जनवरी-फरवरी के दौरान स्थापित किया गया था, जिसकी पूरी कार्यप्रणाली को अंबाला स्थित अटल कैंसर केयर सेंटर की टीम द्वारा जांचा और प्रमाणित किया गया है। वर्तमान में यहाँ छह बेड का एक समर्पित वार्ड बनाया गया है, जहाँ कीमोथेरेपी के साथ-साथ पैलिएटिव केयर (उपशामक देखभाल) की सुविधा भी उपलब्ध है। यद्यपि अस्पताल में अभी पूर्णकालिक ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) तैनात नहीं है, लेकिन यहाँ के जनरल मेडिसिन विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ को दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) के कैंसर सेंटर में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। यह केंद्र सीधे अंबाला के कैंसर अस्पताल से जुड़ा हुआ है, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ प्रोटोकॉल के तहत उपचार मिल सकेगा।
उपचार की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने एक विशेष निर्देशिका जारी की है। इसके तहत, जो भी मरीज कैंसर से ग्रसित पाए जाते हैं, उन्हें सबसे पहले अंबाला के अटल कैंसर केयर सेंटर जाकर अपना उपचार प्रोटोकॉल तैयार करवाना होगा। वहां से करनाल सिविल अस्पताल के नाम रेफरल लेने के बाद, उनकी आगे की सभी कीमोथेरेपी डोज स्थानीय अस्पताल में ही दी जा सकेंगी। इससे मरीजों को बार-बार अंबाला जाने की परेशानी और वहां रहने-खाने के अतिरिक्त खर्च से छुटकारा मिलेगा।
चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ सरकार द्वारा कैंसर पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी यहाँ प्रमुखता से दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत, कैंसर की तीसरी और चौथी स्टेज के उन रोगियों को ₹3000 की मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹3 लाख से कम है। अब तक हजारों लाभार्थी इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं। सिविल अस्पताल के इस नए वार्ड के बाहर ऐसी सभी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रदर्शित की गई है, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीज इनका लाभ उठा सकें।
अस्पताल की भविष्य की योजनाओं के बारे में फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि कीमोथेरेपी के अलावा, अस्पताल में जल्द ही एक ‘इम्यूनो एनालाइजर’ मशीन भी पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। यह मशीन अत्यंत उन्नत है और इसके जरिए विटामिन डी, बी-12, कैंसर मार्कर्स और हृदय रोगों से संबंधित जटिल टेस्ट कम लागत में अस्पताल के भीतर ही संभव हो सकेंगे। वर्तमान में इन टेस्टों के लिए मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में मोटी रकम चुकानी पड़ती है। डॉ. गोयल के अनुसार, यदि भविष्य में कैंसर मरीजों की संख्या और मांग बढ़ती है, तो इस छह बेड वाले वार्ड की क्षमता को और विस्तार दिया जाएगा। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।