February 15, 2026
15 Feb 15

करनाल: शहर के प्रतिष्ठित बीनस्टॉक प्री एंड जूनियर स्कूल की मॉडल टाउन, सेक्टर 32 और सेक्टर 33 स्थित तीनों शाखाओं में महाशिवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर स्कूल परिसर पूरी तरह शिव भक्ति के रंग में डूबा नजर आया, जहाँ नन्हे-मुन्ने बच्चों ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान शिव के जीवन और उनके आदर्शों को भी साझा किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्कूल की अध्यापिका चित्राक्षी ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि बीनस्टॉक में त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों को प्राकृतिक रूप से नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सिखाने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के माध्यम से बच्चे जीवन में संयम, सकारात्मकता और संतुलन (Balance) जैसे गुणों को आत्मसात कर रहे हैं।

इस दौरान विभिन्न कक्षाओं के छात्रों ने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कक्षा एक के छात्र आव्यान ने बताया कि महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाई जाती है और इसी दिन महादेव ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी। वहीं, सारा बजाज और अद्वैता जैसी छात्राओं ने सुंदर कविताओं और श्लोकों के माध्यम से शिव के ‘भोले’ और ‘दयालु’ स्वरूप का वर्णन किया। बच्चों ने बताया कि शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल, दूध, धतूरा और बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है।

आयोजन का एक मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा स्वयं शिवलिंग का निर्माण करना रहा। अध्यापिका चांदनी के मार्गदर्शन में बच्चों ने प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर शिवलिंग बनाए और पूरी निष्ठा के साथ उनका पूजन किया। इसके साथ ही, स्कूल में एक विशेष असेंबली का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्रों ने आध्यात्मिक नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों के भीतर मंच पर बोलने के आत्मविश्वास (Stage Confidence) को बढ़ाना और उन्हें अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ना था।

स्कूल की सेंटर हेड हर्ष ने इस अवसर पर कहा कि बचपन से ही बच्चों को संस्कारों और आध्यात्मिकता से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जब बच्चे व्यावहारिक रूप से त्योहारों को मनाते हैं, तो वे जीवन भर उन सीखों को याद रखते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके लिए अभिभावक वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।

संपूर्ण कार्यक्रम ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गूंज उठा। स्कूल प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास (Overall Development) है, जिसमें कला, शिल्प, कहानी वाचन और सांस्कृतिक मूल्यों का समान महत्व है।

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