February 9, 2026
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करनाल: विकास के बड़े-बड़े दावों और मेट्रो शहरों की तर्ज पर शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स आज करनाल में जनता के पैसे की बर्बादी की कहानी बयां कर रहे हैं। ताजा मामला शहर में बनाए गए 18 ‘बस क्यू शेल्टर्स’ का है, जिन्हें ₹85 लाख की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया था। आज ये शेल्टर्स यात्रियों को सुविधा देने के बजाय केवल कंपनियों के विज्ञापन लगाने की साइट बनकर रह गए हैं।

शहर के सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक परिवहन को सुगम बनाने के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा इन शेल्टर्स का निर्माण कराया गया था। योजना यह थी कि शहर में चलने वाली सिटी बसों के लिए ये स्टॉपेज का काम करेंगे, जहाँ यात्री रुककर बसों का इंतजार कर सकेंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। 2018 में बड़े उत्साह के साथ शुरू की गई सिटी बस सेवा को 2020 में कोरोना काल के दौरान करीब 2 करोड़ रुपये का घाटा होने की बात कहकर बंद कर दिया गया। वर्तमान में केवल एक-दो बसें कुंजपुरा रूट पर चलती हैं, लेकिन उनका भी कोई निश्चित समय या रूट चार्ट यात्रियों को स्पष्ट नहीं है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पैसा किसी राजनेता की निजी संपत्ति नहीं बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई है। करनाल में इससे पहले भी सांझी साइकिल, नाइट मार्केट, स्ट्रीट फूड मार्केट और ‘शीरो रूम’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स लाए गए, लेकिन इनमें से एक भी प्रोजेक्ट व्यवस्थित तरीके से नहीं चलाया जा सका। इन योजनाओं को शुरू करते समय महिलाओं को ड्राइवर के रूप में तैनात कर रोजगार देने जैसे वादे भी किए गए थे, जो अब ठंडे बस्ते में नजर आ रहे हैं।

व्यवस्था की कमी के कारण नगर निगम और अन्य प्रमुख स्थानों पर बने ये बस क्यू शेल्टर अब जर्जर हालत में हैं या पोस्टरों से पटे हुए हैं। जनता में इस बात को लेकर भारी रोष है कि बिना किसी ठोस योजना और प्रबंधन के करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट क्यों थोपे जाते हैं, जिनका लाभ अंततः आम नागरिक को नहीं मिल पाता। शहरवासियों का कहना है कि सरकारों को प्रोजेक्ट लॉन्च करने के साथ-साथ उनके व्यवस्थित संचालन और रखरखाव पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन का इस तरह दुरुपयोग न हो।

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