हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने करनाल के सरकारी अस्पताल का औचक दौरा कर वहां स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से थैलेसीमिया वार्ड में जाकर वहां उपचाराधीन बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की। अध्यक्ष की यह संवेदनशीलता उस समय देखने को मिली जब वह अस्पताल की सीढ़ियों से भागते हुए ऊपर पहुंचे ताकि समय बचाकर अधिक से अधिक बच्चों से संवाद कर सकें। थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों और उनके माता-पिता के लिए यह क्षण काफी ढांढस बंधाने वाला रहा, जब प्रदेश के एक उच्च पदस्थ पदाधिकारी ने स्वयं आकर उनकी समस्याओं को सुना।
मुलाकात के दौरान जब विधानसभा अध्यक्ष के सामने बच्चों के इलाज में आने वाली पेचीदगियों और भारी खर्च का विषय आया, तो उन्होंने तुरंत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। वार्ड में मौजूद डॉक्टरों और समाजसेवी संस्थाओं ने बताया कि कुछ बच्चों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें तुरंत ‘स्प्लीन’ (तिल्ली) रिमूव करवाने के ऑपरेशन की आवश्यकता है। सरकारी स्तर पर रोहतक और चंडीगढ़ जैसे बड़े केंद्रों में प्रतीक्षा समय अधिक होने के कारण परिजनों को काफी कठिनाई हो रही थी। वहीं, निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन का खर्च काफी अधिक है, जिसे वहन करना गरीब परिवारों के लिए असंभव है।
हरविंदर कल्याण ने इस मुद्दे पर बेहद गंभीर रुख अपनाया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन 16-17 बच्चों को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत है, उनका पूरा प्रस्ताव तैयार कर सोमवार तक उन्हें भेजा जाए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वह इन बच्चों के इलाज के लिए सोमवार को ही फंड स्वीकृत करेंगे ताकि बिना किसी देरी के इनका उपचार शुरू हो सके। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि व्यवस्थाएं चाहे कहीं भी हों—चाहे वह करनाल का कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज हो या कोई अन्य केंद्र—इन बच्चों को प्राथमिक आधार पर इलाज मिलना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी कि करनाल का यह केंद्र न केवल हरियाणा के 13 विभिन्न जिलों के बच्चों को सेवाएं दे रहा है, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के शामली, बिजनौर और मुजफ्फरनगर जैसे इलाकों से भी बड़ी संख्या में पीड़ित यहां पहुंच रहे हैं। हर महीने यहां करीब 2200 से 2500 यूनिट रक्त की व्यवस्था थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए की जाती है। अध्यक्ष ने इस बात पर संतोष जताया कि यहां बिना किसी ‘रिप्लेसमेंट’ के बच्चों को रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी उपलब्धि है।
बच्चों से बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का एक बेहद मानवीय चेहरा भी सामने आया। उन्होंने एक छोटी बच्ची से उसकी शिक्षा और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात की। जब उन्हें पता चला कि बच्ची का प्रिय विषय गणित है, तो उन्होंने उसकी बहादुरी की सराहना की और उससे पूछा कि वह बड़ी होकर इंजीनियर, आईएएस या पुलिस अधिकारी में से क्या बनना चाहती है। उन्होंने बच्चों से वादा किया कि वह जल्द ही उनसे दोबारा मिलने आएंगे और उनके स्वास्थ्य की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे।
अंत में, मीडिया से बात करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों की सेवा करना समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में जिले और प्रदेश में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी जिससे किसी भी बच्चे को इलाज के अभाव में परेशान न होना पड़े। उन्होंने समाजसेवियों के योगदान की भी सराहना की जो लगातार इन बच्चों के लिए रक्त और अन्य सुविधाएं जुटाने में मदद कर रहे हैं। इस दौरे ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त किया है, बल्कि पीड़ित परिवारों में एक नई उम्मीद भी जगाई है।