करनाल: हरियाणा के करनाल जिले में धान खरीद के दौरान हुए करोड़ों रुपये के महाघोटाले में पुलिस की एसआईटी (SIT) टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी अधिकारियों का पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। पकड़े गए अधिकारियों में खाद्य आपूर्ति विभाग और हैफेड के उच्च पदों पर तैनात कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने राइस मिलर्स के साथ मिलीभगत कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इन अधिकारियों ने तरावड़ी और इंद्री जैसी मंडियों में कागजों में ही धान की खरीद दिखाकर गबन को अंजाम दिया। इनमें इंद्री अनाज मंडी के इंस्पेक्टर रणधीर सिंह पर 2 करोड़ 61 लाख रुपये के धान गबन का आरोप है। इसी तरह तरावड़ी के इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, हैफेड असंध के प्रबंधक प्रमोद, हैफेड निसिंग के प्रबंधक दर्शन सिंह और वेयर हाउस इंद्री के तकनीकी सहायक प्रदीप को भी गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी तरीके से धान की आवक दिखाई, जबकि धरातल पर स्टॉक गायब था।
असंध क्षेत्र की दो राइस मिलों में करीब 7 करोड़ रुपये का धान कम पाया गया था, जिसकी जांच की आंच हैफेड मैनेजर प्रमोद तक पहुँची। वहीं, निसिंग मंडी से असंध कागजों में भेजे गए धान के मामले में जीपीएस सिस्टम बंद पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि गाड़ियों की आवाजाही केवल दस्तावेजों तक सीमित थी। इस मामले में पुलिस ने पहले ही तीन राइस मिलर्स को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रिमांड के दौरान इन अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुई हैं। जांच का दायरा अब मंडी सचिवों, आढ़तियों और अन्य राइस मिलर्स तक फैल गया है। एसआईटी का मानना है कि यदि जांच की गहराई इसी प्रकार जारी रही, तो आने वाले दिनों में कई और रसूखदार अधिकारी और व्यापारी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। करनाल पुलिस की इस कड़ी कार्रवाई से भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है।