करनाल शहर में रंगों के पावन पर्व होली की दस्तक से पहले ही फिजाओं में गुलाल और खुशियों की महक घुल गई है। शहर के प्रतिष्ठित करनाल क्लब में महिलाओं के एक समूह ने ‘प्री-होली’ उत्सव का भव्य आयोजन किया, जिसमें न केवल रंगों की बौछार दिखी, बल्कि आपसी प्रेम और सौहार्द का अनूठा संगम भी देखने को मिला। होली के मुख्य पर्व से पहले आयोजित इस मिलन समारोह में महिलाओं ने अपनी रोजमर्रा की व्यस्तताओं को पीछे छोड़कर पूरे जोश और एंथूसियाज्म के साथ उत्सव का आनंद लिया।
समारोह की शुरुआत पारंपरिक होली गीतों और लोक धुनों के साथ हुई। “रंग बरसे भीगे चुनर वाली” जैसे सदाबहार गीतों पर महिलाओं ने थिरकते हुए माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। इस दौरान केवल कृत्रिम रंगों का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहते हुए फूलों की होली का भी विशेष प्रबंध किया गया था। पंखुड़ियों की बारिश और रंग-बिरंगे गुलाल के बीच पूरा परिसर इंद्रधनुषी छटा में सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने बताया कि वे इस दिन का पूरे साल बेसब्री से इंतजार करती हैं क्योंकि यह एक ऐसा अवसर है जब वे अपनी सखियों के साथ खुलकर मस्ती कर पाती हैं।
आयोजन की खास बात यह रही कि अधिकांश प्रतिभागी सफेद रंग के परिधानों में सजे हुए थे, जिस पर पड़ने वाले सतरंगी गुलाल के छींटे उनके उत्साह को और अधिक दर्शा रहे थे। आयोजकों ने बताया कि इस पार्टी का उद्देश्य केवल रंग खेलना नहीं, बल्कि महिलाओं को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी खुशियां साझा कर सकें। घर पर अक्सर सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते महिलाएं उस तरह से होली नहीं खेल पातीं जैसी वे चाहती हैं, इसलिए करनाल क्लब का यह आयोजन उनके लिए आजादी और उल्लास का प्रतीक बन गया।
पार्टी में केवल नाच-गाना ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के मनोरंजक खेलों (गेम्स) का भी आयोजन किया गया, जिसने सभी का भरपूर मनोरंजन किया। होली के पारंपरिक खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा गया था। अतिथियों के लिए विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और विशेष रूप से तैयार की गई ठंडाई का प्रबंध था, जो होली के आनंद को दोगुना कर रहा था। समूह की सदस्य महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं और समाज में भाईचारे का संदेश दिया।
आयोजकों ने इस दौरान बातचीत करते हुए कहा कि सखियों के साथ मनाया जाने वाला यह छोटा सा कार्यक्रम उनकी एकजुटता को दर्शाता है। उनके अनुसार, गुलाल का रंग चेहरे की सुंदरता को किसी भी कृत्रिम मेकअप से कहीं अधिक बढ़ा देता है क्योंकि इसके पीछे सच्ची खुशी और मुस्कुराहट छिपी होती है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर आने वाली होली की अग्रिम बधाई दी और इस यादगार शाम को तस्वीरों में कैद किया। करनाल के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि त्योहार केवल तिथि विशेष के मोहताज नहीं होते, बल्कि उन्हें मनाने का जज्बा हो तो खुशियां पहले ही द्वार पर दस्तक दे देती हैं। पूरा शहर अब इसी रंगीन मिजाज के साथ मुख्य होली के स्वागत के लिए तैयार है।