करनाल: हरियाणा के करनाल में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले को लेकर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने गहन छानबीन के बाद विभिन्न सरकारी विभागों के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार और पुलिस के कड़े रुख को स्पष्ट करती है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में केवल निलंबन या कागजी खानापूर्ति ही देखी जाती थी।
करनाल की डीएसपी मीना कुमारी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस घोटाले के संबंध में दर्ज चार प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर एएसपी की अध्यक्षता में बनी एसआईटी ने साक्ष्य जुटाए थे। गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (DFSC) के दो इंस्पेक्टर, हैफेड (HAFED) के दो मैनेजर और एक तकनीकी सहायक शामिल हैं। इन सभी को न्यायालय में पेश कर अलग-अलग अवधि के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
पकड़े गए अधिकारियों की पहचान तरावड़ी से फूड सप्लाई इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, इंद्री से इंस्पेक्टर रणधीर सिंह, असंध से हैफेड मैनेजर प्रमोद कुमार, निसिंग से हैफेड मैनेजर दर्शन सिंह और इंद्री वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के तकनीकी सहायक प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि इन अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी गेट पास जारी किए थे और बिना भौतिक आवक के कागजों पर धान की एंट्री कर करोड़ों रुपये का आर्थिक चूना सरकार को लगाया था।
पुलिस के अनुसार, यह घोटाला अक्टूबर-नवंबर के धान खरीद सीजन के दौरान हुआ था। डीएसपी ने स्पष्ट किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और रिमांड के दौरान आरोपियों से सघन पूछताछ की जाएगी। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में कई बड़े राइस मिलर्स, आढ़ती और अन्य उच्चाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि तफ्तीश में जिसकी भी संलिप्तता पाई जाएगी, चाहे वह किसी भी विभाग का अधिकारी हो या प्रभावशाली नागरिक, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।