करनाल: हरियाणा में राजस्व विभाग के पटवारियों ने अपने छह साथियों के निलंबन के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। राज्य भर में जिला स्तर पर पटवारियों द्वारा तीन दिवसीय सांकेतिक धरना शुरू किया गया है, जिसके कारण सरकारी दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, और स्थिति यह हो गई है कि लोग अपने जरूरी काम करवाने के लिए अब धरना स्थलों के ही चक्कर काटने को मजबूर हैं।
राजस्व पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के आह्वान पर यह हड़ताल 2 फरवरी से 4 फरवरी तक चलेगी। एसोसिएशन का मुख्य विरोध उन छह पटवारियों के निलंबन को लेकर है जिन पर बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा था। पटवारी यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने उनके साथियों के खिलाफ गलत आधार पर कार्रवाई की है।
विवाद का मुख्य कारण बाढ़ प्रभावित फसलों के निरीक्षण के दौरान फोटो अपलोड करने से जुड़ा है। सरकार का आरोप है कि पटवारियों ने अलग-अलग खेतों की अलग-अलग फोटो लेने के बजाय एक ही स्थान से कई एकड़ की तस्वीरें लेकर पोर्टल पर डाल दीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब 50 से 100 एकड़ जमीन लगातार जलमग्न हो, तो दृश्य हर तरफ एक जैसा ही रहता है। ऐसे में एक ही जगह से तीन-चार एकड़ की तस्वीर लेना किसी भी दृष्टि से गलत नहीं था।
हड़ताल के चलते ग्रामीण इलाकों से आए बुजुर्ग और किसान भारी परेशानी झेल रहे हैं। ठंड के बावजूद सुबह-सुबह दफ्तर पहुंचे ग्रामीणों को जब वहां कोई अधिकारी नहीं मिला, तो वे अपनी फाइलें और फॉर्म लेकर सीधे धरना स्थल पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि उनके काम कई दिनों से रुके हुए हैं और उन्हें बार-बार शहर आना पड़ता है जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। कई लोग तो अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में धरना दे रहे पटवारियों के साथ ही बैठ गए हैं।
यूनियन के जिला प्रधान ने साफ किया कि जनता को परेशान करना उनकी मंशा नहीं है, लेकिन वे अपने साथियों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठ सकते। यदि सरकार 4 फरवरी तक इन पटवारियों को बहाल नहीं करती है, तो आगामी रणनीति राज्य कार्यकारिणी के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी। फिलहाल, प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।