January 31, 2026
30 Jan 12

हरियाणा के करनाल जिले में स्थित सरकारी अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में लंबी कतारों में लगने और घंटों इंतजार करने के बाद जब वे डॉक्टर के पास पहुँचते हैं, तो उन्हें अस्पताल के भीतर मिलने वाली निशुल्क दवाओं के बजाय बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घरौंडा से अपनी एक महीने की बीमार बच्ची को लेकर आए एक पिता को अस्पताल में एक भी दवा नहीं मिली। उन्हें सभी दवाइयां बाहर से लाने के लिए पर्ची थमा दी गई। पीड़ित पिता ने बताया कि यदि उनके पास बाहर से ₹800-₹1000 की दवाइयां खरीदने के पैसे होते, तो वे सरकारी अस्पताल में धक्के खाने के बजाय किसी निजी अस्पताल में ही चले जाते। कई मरीजों ने यह भी बताया कि डॉक्टर न केवल बाहर की दवा लिखते हैं, बल्कि उन्हें दवा खरीदकर वापस आकर दिखाने को भी कहते हैं, जो सीधे तौर पर डॉक्टरों और निजी केमिस्टों के बीच कथित ‘कमीशनखोरी’ की ओर इशारा करता है।

अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। किसी को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर भेजा जा रहा है, तो किसी को मामूली दर्द और कब्ज की दवाइयां भी बाहर से खरीदने को कहा जा रहा है। मरीजों का आरोप है कि जो दवा का पत्ता अस्पताल के भीतर या जेनेरिक स्टोर पर कम दाम में मिल सकता है, डॉक्टर जानबूझकर उसी साल्ट की महंगी ब्रांडेड दवा लिखते हैं जो बाहर तीन से चार गुना अधिक दाम पर मिलती है। लोगों का मानना है कि यह सब दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच की सांठगांठ का नतीजा है, जिसमें भारी मुनाफे और अन्य प्रलोभनों का खेल चलता है।

इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस ओर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। मांग की जा रही है कि विजिलेंस विभाग को डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्चियों की नियमित जांच करनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि कितनी दवाइयां जानबूझकर बाहर की लिखी गई हैं। गरीबों के नाम पर चलने वाले सरकारी अस्पतालों में यदि इसी तरह का खेल चलता रहा, तो जरूरतमंदों के लिए मुफ्त इलाज का उद्देश्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.