हरियाणा के करनाल जिले में आज पटवारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। द रिवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश भर के पटवारी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहे। करनाल में जिला सचिवालय के समक्ष बड़ी संख्या में पटवारी एकत्रित हुए और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन के कारण तहसील और राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज पूरी तरह ठप रहे, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पटवारियों के इस आक्रोश का मुख्य कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों से छह पटवारियों का निलंबन है। जानकारी के अनुसार, अक्टूबर माह में हुई भारी बारिश के बाद फसल खराबे का सर्वे किया जा रहा था। उस दौरान इन पटवारियों पर आरोप लगा कि उन्होंने एक ही स्थान पर खड़े होकर कई एकड़ की फोटो अपलोड कर दी और काम में लापरवाही बरती। इसी के चलते मुख्यमंत्री ने उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया था। धरने पर बैठे पटवारियों का कहना है कि खेतों में चार-चार फीट पानी भरा होने के कारण हर खसरे नंबर पर जाना संभव नहीं था, फिर भी उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में काम किया।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को सस्पेंड करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए या फिर किसी कमेटी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि बिना स्पष्टीकरण मांगे या पक्ष सुने सीधे घर बिठा देना तानाशाहीपूर्ण रवैया है। पटवारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आज शाम तक निलंबित साथियों की बहाली नहीं की गई, तो राज्य कार्यकारिणी के निर्देशानुसार यह सांकेतिक धरना एक लंबी और अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते, लेकिन कर्मचारियों के सम्मान और न्याय के लिए पीछे भी नहीं हटेंगे। उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी प्रशासन को सौंपा है। फिलहाल, सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के माध्यम से इस गतिरोध को सुलझाया जाता है या आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।