पिछले कुछ हफ्तों से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे सराफा बाजार में एक नया रिकॉर्ड बनता नजर आ रहा है। करनाल के सराफा बाजार से मिल रही जानकारी के मुताबिक, सोने और चांदी के रेट आसमान छू रहे हैं, जिसका सीधा असर आम खरीदारों और निवेशकों पर पड़ रहा है। ज्वैलर्स का कहना है कि शादियों के सीजन में मांग बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में जारी उतार-चढ़ाव भी कीमतों में उछाल की एक बड़ी वजह है।
करनाल के एक प्रमुख ज्वैलर अंशुल बंसल ने बताया कि अमेरिका और अन्य बड़े देशों के बीच चल रही तनातनी के कारण निवेशकों का भरोसा डॉलर से उठकर धातुओं (Metals) की ओर मुड़ गया है। यही कारण है कि न केवल सोना और चांदी, बल्कि तांबा और निकल जैसी अन्य धातुओं के दाम भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल दिवाली के बाद से अब तक चांदी की कीमतों में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। चांदी जो पहले ₹70,000 प्रति किलो के आसपास थी, वह अब ₹3,30,000 के पार पहुंच गई है। इसी तरह, सोने के दाम भी ₹90,000 से बढ़कर ₹1,60,000 के स्तर पर आ गए हैं।
कीमतों में इस भारी उछाल का असर ग्राहकों की खरीदारी के तरीके पर भी दिख रहा है। ज्वैलर्स का कहना है कि भारतीय समाज में शादियों के दौरान एक निश्चित मात्रा में सोना देने की परंपरा है, जिसे लोग निभाते तो हैं, लेकिन अब वे अपने बजट के अनुसार गहनों का वजन कम कर रहे हैं। जो ग्राहक पहले 10 ग्राम सोना खरीदते थे, वे अब 2.5 से 5 ग्राम में काम चला रहे हैं। इसका असर बैंकेट और डेकोरेशन जैसे अन्य खर्चों पर भी पड़ सकता है क्योंकि लोग सोने के लिए बजट बढ़ाने के बजाय अन्य खर्चों में कटौती कर रहे हैं।
निवेश के नजरिए से विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति लंबी अवधि (Long Term) के लिए निवेश करना चाहता है, तो सोना सबसे सुरक्षित विकल्प है। सोना एक ऐसी संपत्ति है जिसे संकट के समय, यहां तक कि आधी रात को भी बेचकर नकद प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, जो लोग ट्रेडिंग या शॉर्ट टर्म में मुनाफा कमाना चाहते हैं, उनके लिए चांदी एक बेहतर विकल्प हो सकती है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव का जोखिम अधिक रहता है।
बाजार में चांदी की भारी किल्लत और 15-15 दिन की वेटिंग के चलते कुछ डुप्लीकेट माल बेचने वाले भी सक्रिय हो गए हैं, जिससे ग्राहकों को सावधान रहने की जरूरत है। सट्टा बाजार में भी कई लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि यहां अधिकतर खरीदारी फिजिकल गोल्ड (भौतिक रूप में सोना) में होती है, न कि सट्टे या एमसीएक्स (MCX) के जरिए, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।
निष्कर्षतः, सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें वैश्विक आर्थिक स्थितियों का परिणाम हैं। हालांकि अभी कीमतों में कमी के आसार कम हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व और सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी स्वीकार्यता इसे हमेशा मांग में बनाए रखेगी। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार ही निवेश का निर्णय लें।