January 10, 2026
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करनाल में गोगड़ीपुर रोड पर प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। जिला नगर योजनाकार (DTP) गुंजन वर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ टीम मौके पर पहुँची और एक अवैध कॉलोनी में निर्माणाधीन दो मंजिला मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस दौरान प्रशासन की सख्त कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में रोष और दुःख का माहौल देखा गया।

यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ित मकान मालिक, भीम सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि वह पिछले आठ महीनों से इस मकान का निर्माण कर रहे थे। उन्होंने लगभग 60 लाख रुपये में यह जमीन खरीदी थी और करीब 60-70 लाख रुपये इसके निर्माण पर खर्च कर चुके थे। उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी इस दो मंजिला ढांचे में लगी थी। पीड़ित का आरोप है कि जब आठ महीनों से मुख्य सड़क पर यह निर्माण कार्य चल रहा था, तब किसी भी अधिकारी ने उन्हें रोकने या नोटिस देने की जहमत नहीं उठाई। अब, जब मकान लगभग बनकर तैयार हो गया था, तब प्रशासन इसे गिराने पहुँच गया।

डीटीपी गुंजन वर्मा ने इस संबंध में बताया कि विभाग द्वारा मासिक आधार पर डिमोलिशन प्रोग्राम (ध्वस्तीकरण कार्यक्रम) तैयार किए जाते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शहर में अवैध साइट्स की संख्या अधिक होने के कारण सभी स्थानों पर तुरंत पहुँचना कठिन होता है, जिसके चलते यहाँ पहुँचने में समय लग गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनियों में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है और रजिस्ट्री पर भी रोक है। लोग अक्सर डीलर और कॉलोनाइजरों के झांसे में आकर एग्रीमेंट के आधार पर ऐसी जमीनों पर निवेश कर देते हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान घटनास्थल पर मौजूद अन्य लोगों ने भी अपनी व्यथा व्यक्त की। उनका कहना है कि मध्यम वर्गीय परिवार सेक्टरों में महंगे प्लॉट नहीं खरीद सकते, इसलिए वे ऐसी कॉलोनियों का रुख करते हैं। लेकिन प्रशासन को चाहिए कि वह निर्माण शुरू होने के समय ही सख्त कदम उठाए ताकि लोगों का लाखों रुपया बर्बाद न हो।

वहीं, विभाग ने सख्त लहजे में कहा है कि अवैध कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और उन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी भूखंड को खरीदने से पहले विभाग के कार्यालय में जाकर उसकी वैधता की जाँच अवश्य करें, ताकि भविष्य में इस प्रकार की बड़ी आर्थिक क्षति से बचा जा सके।

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