हरियाणा के करनाल में अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। शहर के गोगड़ीपुर रोड पर स्थित एक अवैध कॉलोनी में बने दो मंजिला मकान पर जिला प्रशासन और डीटीपी विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारी पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
हैरानी की बात यह है कि जिस मकान को प्रशासन ने ढहाया है, उसका निर्माण पिछले 8 महीनों से चल रहा था और वह पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका था। पीड़ित मकान मालिक, जो एक साधारण पृष्ठभूमि से आता है, ने बताया कि उसने अपनी जिंदगी भर की खून-पसीने की कमाई इस मकान को बनाने में लगा दी थी। उसने दावा किया कि निर्माण के दौरान उसे प्रशासन की ओर से न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही किसी ने काम रोकने के लिए कहा। अब जब मकान बनकर तैयार हो गया, तो अचानक प्रशासन ने इसे अवैध बताकर गिरा दिया, जिससे उसे लाखों रुपयों का आर्थिक नुकसान हुआ है।
इस पूरी कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि जब नींव रखी जा रही थी या जब निर्माण शुरुआती दौर में था, तब प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे क्यों नहीं रोका? एक पूरा दो मंजिला ढांचा तैयार होने के बाद जागना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। इससे न केवल संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी भी मिट्टी में मिल जाती है।
हाल ही में स्थानीय विधायक जगमोहन आनंद ने भी जनता से पुरजोर अपील की थी कि वे भू-माफियाओं के झांसे में न आएं और ऐसी अवैध कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें। उन्होंने स्पष्ट किया था कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अवैध रूप से पनप रही कॉलोनियों को रोकने के लिए चलाया जा रहा है। हालांकि, जनता के मन में यह सवाल अब भी बरकरार है कि क्या प्रशासन केवल मकान बन जाने के बाद ही जागने की अपनी आदत को बदलेगा या भविष्य में निर्माण शुरू होने के समय ही सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।