हरियाणा के करनाल जिले में इन दिनों एक ऐसे पुलिस अधिकारी की चर्चा जोरों पर है, जिन्होंने ऊंचे पहाड़ों की चोटियों को फतह करने के बाद अब समाज से अपराध और नशे जैसी बुराइयों को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। यह कहानी है इंस्पेक्टर रामलाल की, जो वर्तमान में करनाल के सिविल लाइंस थाने में एसएचओ (SHO) के पद पर तैनात हैं। रामलाल का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की एक अनूठी मिसाल है, जो आज के युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
रामलाल ने वर्ष 2013 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। उस समय वे हरियाणा के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बने थे। पर्वतारोहण के क्षेत्र में कई विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने के बाद उन्होंने पुलिस विभाग ज्वाइन किया। उन्होंने न केवल पहाड़ों की चढ़ाई की, बल्कि अंडर-वॉटर साइकिलिंग और स्काई-डाइविंग जैसे साहसिक खेलों में भी अपनी पहचान बनाई। उनके इसी असाधारण सफर पर ‘रेहड़ी से एवरेस्ट’ नामक एक पुस्तक भी लिखी गई है, जिसका विमोचन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। यह पुस्तक दर्शाती है कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला युवा कड़ी मेहनत और धैर्य के बल पर शिखर तक पहुंच सकता है।
पुलिस सेवा में आने के बाद रामलाल ने नशे के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया है। उन्होंने अब तक 15 लाख से अधिक लोगों को ड्रग्स के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया है। करनाल में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराधियों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे शॉर्टकट के चक्कर में अपराध की दुनिया में कदम न रखें, क्योंकि यह रास्ता केवल बर्बादी की ओर ले जाता है। इसके बजाय, वे खेलों में भाग लेकर मेडल जीतें, जिससे न केवल उन्हें सरकारी नौकरियां मिलेंगी, बल्कि उनका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।
समाज सेवा को अपना परम कर्तव्य मानने वाले इंस्पेक्टर रामलाल का कहना है कि पुलिस और जनता के बीच सहयोग से ही अपराध मुक्त वातावरण का निर्माण संभव है। वे स्वयं को फिट रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम और दौड़ को समय देते हैं। उनकी कार्यशैली और नशे के विरुद्ध उनकी सक्रियता ने न केवल करनाल बल्कि पूरे प्रदेश में उन्हें एक चर्चित चेहरा बना दिया है।