हरियाणा के करनाल जिले में आज किसानों ने भ्रष्टाचार और धान घोटाले के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए जिला सचिवालय का घेराव किया। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किया। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए किसानों ने सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि धान घोटाले में संलिप्त बड़े अधिकारियों और रसूखदार नेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
जिला सचिवालय परिसर में दाखिल होने के दौरान किसानों और पुलिस प्रशासन के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, क्योंकि पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया था। हालांकि, किसानों के भारी विरोध और अडिग रुख को देखते हुए उन्हें सचिवालय के पार्क में जाने की अनुमति दी गई। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि धान घोटाला एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है, जिसमें सरकार के करीबी लोग और उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक जिले का मामला नहीं है, बल्कि कई प्रदेशों में गरीब कल्याण के लिए आने वाले चावल की हेराफेरी की जा रही है।
किसान नेता ने स्पष्ट किया कि धान घोटाले के साथ-साथ निजी अस्पतालों, स्कूलों की लूट, बिजली और बीज बिल जैसे जनविरोधी मुद्दों को लेकर अब एक बड़ा प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि करनाल के बाद 10 तारीख को कुरुक्षेत्र और 15-16 तारीख को यमुनानगर सहित राज्य के हर जिले में चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे। इस आंदोलन का समापन 23 मार्च को शहीद भगत सिंह के शहीदी दिवस पर कुरुक्षेत्र के पीपली में एक विशाल रैली के साथ होगा, जहां आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
किसानों ने मांग की है कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए, क्योंकि स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित होने की पूरी आशंका है। उनका तर्क है कि अब तक केवल छोटी मछलियों पर कार्रवाई हुई है, जबकि घोटाले के असली ‘मगरमच्छ’ अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। जिला सचिवालय में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस बल तैनात रहा। फिलहाल किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी उग्र रूप धारण कर सकता है।