हरियाणा के करनाल जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति अचानक कम होने से खाद्य सामग्री के व्यापार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। गैस एजेंसियों और ढाबा संचालकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि अब इनका वितरण बेहद सीमित कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, गैस एजेंसियां प्राथमिकता के आधार पर केवल शैक्षणिक संस्थानों (स्कूलों-कॉलेजों) और अस्पतालों को ही कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध करा रही हैं, जबकि होटलों, ढाबों और रेस्तरां की आपूर्ति पर लगभग ब्रेक लग गया है।
करनाल जिले की 42 गैस एजेंसियों के माध्यम से होने वाली आपूर्ति में आई इस बाधा ने पूरे जिले के करीब 300 से अधिक बड़े ढाबा संचालकों और छोटे खाद्य विक्रेताओं को सीधा प्रभावित किया है। गैस वितरकों का कहना है कि पीछे से सिलेंडरों की आवक कम होने के कारण उन्हें स्टॉक को राशनिंग के जरिए बांटना पड़ रहा है। कई वितरकों ने स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान में ढाबा संचालकों को महीने में केवल एक या दो सिलेंडर ही दे पा रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, सरकार की ओर से यह संकेत मिले हैं कि अब साल भर में केवल 12 कमर्शियल सिलेंडर ही व्यावसायिक संस्थानों को मिल पाएंगे। इस घोषणा ने ढाबा संचालकों की रातों की नींद उड़ा दी है। संचालकों का तर्क है कि उनके यहां एक महीने में ही 25 से 30 सिलेंडरों की खपत हो जाती है। ऐसे में साल भर के लिए केवल 12 सिलेंडर मिलना ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। व्यापारियों ने सवाल उठाया है कि बिना पर्याप्त ईंधन के वे अपना कारोबार कैसे चलाएंगे।
समोसा और स्नैक्स बेचने वाले व्यापारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि तंदूर जैसे वैकल्पिक साधन केवल रोटियां बनाने के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन समोसे तलने या मिठाइयां बनाने के लिए गैस भट्टी अनिवार्य है। डीजल के बढ़ते दामों और प्रदूषण नियमों के कारण डीजल भट्टियां भी व्यवहार्य नहीं रह गई हैं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि गैस के दामों में पिछले एक महीने में दो बार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वे अपने ग्राहकों से बढ़ी हुई कीमतें नहीं वसूल पा रहे हैं। कच्चा माल और ईंधन महंगा होने के बावजूद उत्पाद की कीमतें अचानक बढ़ाने से ग्राहकों के टूटने का डर बना रहता है।
संकट केवल कमर्शियल श्रेणी तक ही सीमित नहीं है; घरेलू उपभोक्ताओं को भी अब रसोई गैस के लिए पहले से अधिक मशक्कत करनी होगी। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, घरेलू सिलेंडर की बुकिंग कम से कम 25 दिन पहले करनी होगी। बिना ओटीपी (OTP) और एडवांस बुकिंग के डिलीवरी संभव नहीं होगी। गैस एजेंसियों ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपने स्टॉक को संभलकर इस्तेमाल करें और समय रहते बुकिंग सुनिश्चित करें।
करनाल के विभिन्न क्षेत्रों जैसे क्लब मार्केट और हॉस्पिटल चौक के ढाबा संचालकों ने बताया कि वे आपूर्ति बहाल करने के लिए लगातार कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर तरफ से एक ही जवाब मिल रहा है कि “पीछे से गैस नहीं आ रही है।” इस अनिश्चितता के माहौल में कई व्यापारियों ने कारोबार बंद करने तक की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही आपूर्ति सुचारू नहीं की या कोई ठोस समाधान नहीं निकाला, तो त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल, शहर के खाद्य व्यापारियों में भारी रोष है और वे प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।