January 8, 2026
4 Dec 11

करनाल स्थित गुरुद्वारा डेरा कार सेवा में सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर गुरुद्वारे को बेहद खूबसूरती से सजाया गया और सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। गुरु पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष समागम में दूर-दराज से आए सिख समाज के लोगों और अन्य श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों की श्रृंखला 2 जनवरी को शहर भर में निकाले गए विशाल नगर कीर्तन के साथ शुरू हुई थी, जो विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ डेरा कार सेवा में संपन्न हुआ था। इसी कड़ी में मुख्य कार्यक्रम 4 जनवरी को आयोजित किया गया। गुरुद्वारे में सुबह 10:00 बजे से कीर्तन समागम का शुभारंभ हुआ, जो शाम 4:00 बजे तक चला। इसमें प्रसिद्ध रागी जत्थों और प्रचारकों ने गुरुबाणी के मधुर कीर्तन और गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन से संगत को निहाल किया। शाम के सत्र में भी रात 7:00 बजे से 11:00 बजे तक विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया है।

मानवता की सेवा के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह जी के सिद्धांतों पर चलते हुए, इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर (फ्री हेल्थ चेकअप कैंप) भी लगाया गया। आयोजकों ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना सर्ववंश मानवता की रक्षा के लिए न्योछावर कर दिया था, इसलिए उनके प्रकाश पर्व पर कीर्तन के साथ-साथ सेवा के कार्य भी किए जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं के लिए गुरुद्वारे में अटूट लंगर की व्यवस्था की गई थी। लंगर की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल दाल बनाने के लिए ही तीन क्विंटल से अधिक दाल का उपयोग किया गया। आधुनिक मशीनों और बड़े बर्तनों में भारी मात्रा में दाल, चावल, सब्जी और कढ़ा प्रसाद तैयार किया गया। बड़ी संख्या में महिला सेवादारों और पुरुषों ने रोटी बेलने और लंगर वितरित करने की सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए संगत के लिए गर्म चाय का भी विशेष प्रबंध किया गया था।

आयोजकों ने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन से प्रेरणा लें और मानवता की सेवा के मार्ग पर चलें। पूरा दिन गुरुद्वारा परिसर ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कीर्तन श्रवण करने के साथ-साथ लंगर प्रसाद ग्रहण किया और सेवा में अपना योगदान देकर पुण्य कमाया।

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