वसंत पंचमी का त्यौहार नजदीक आते ही बाजारों में रंग-बिरंगी पतंगों की बहार आ गई है, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर खतरा भी हर साल दस्तक देता है—चाइनीज डोर। इस वर्ष करनाल के बाजारों में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ व्यापारियों और आम जनता ने मिलकर इस जानलेवा मांझे के बहिष्कार का संकल्प लिया है। यह कदम न केवल इंसानी जानों को बचाने के लिए है, बल्कि उन बेजुबान पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए भी है जो हर साल इस अदृश्य मौत का शिकार बनते हैं।
चाइनीज डोर, जिसे ‘खूनी मांझा’ भी कहा जाता है, अपनी मजबूती और धार के लिए जाना जाता है। पतंगबाजी की प्रतिस्पर्धा में दूसरे की पतंग काटने के लालच में लोग इस डोर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी होते हैं। यह डोर प्लास्टिक और रसायनों के मिश्रण से बनी होती है, जो कभी गलती नहीं है। जब यह पतंगों के साथ कटकर बिजली के तारों या पेड़ों पर फंस जाती है, तो यह आने-जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन जाती है। पिछले वर्षों में ऐसी कई हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं जहाँ राहगीरों के गले इस डोर से कट गए और उनकी जान चली गई।
इस बार सदर बाजार के व्यापारियों ने एक मिसाल पेश की है। दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी दुकानों पर चाइनीज डोर रखना पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बजाय, बाजार में ‘पांडा डोर’ और शुद्ध सूती (कॉटन) डोर की मांग बढ़ गई है। सूती डोर पर्यावरण के अनुकूल है और इससे हाथ कटने या किसी बड़े हादसे का खतरा भी न के बराबर होता है। व्यापारियों का मानना है कि यदि वे स्वयं इस डोर को बेचना बंद कर देंगे, तो ग्राहक भी धीरे-धीरे जागरूक होंगे और सुरक्षित विकल्पों की ओर मुड़ेंगे।
पर्यावरण की दृष्टि से भी चाइनीज डोर एक बड़ी चुनौती है। सूती धागा समय के साथ मिट्टी में मिल जाता है, जबकि चाइनीज डोर सालों-साल जमीन और पानी को प्रदूषित करती रहती है। इसके अलावा, आसमान में उड़ने वाले पक्षी अक्सर इस बारीक डोर में उलझ जाते हैं, जिससे उनके पंख कट जाते हैं और वे तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं।
पतंगों की विविधता की बात करें तो इस बार बाजार में सिद्धू मूसेवाला, टाइगर्स और विभिन्न देशों के झंडों वाली पतंगों का जबरदस्त क्रेज है। बच्चों के लिए विशेष रूप से प्लास्टिक की पतंगें उपलब्ध हैं जो बारिश में भी खराब नहीं होतीं, जबकि वयस्क कागज की पारंपरिक पतंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये सभी सामग्री यूपी के रामपुर, बरेली और अहमदाबाद जैसे शहरों से मंगवाई गई है।
समाज के हर वर्ग से अपील की जा रही है कि वे केवल अपने मनोरंजन के लिए किसी की जान को जोखिम में न डालें। दोपहिया वाहन चालकों को भी सलाह दी गई है कि वे वसंत पंचमी के दौरान सड़कों पर निकलते समय विशेष सावधानी बरतें और गले में मफलर या हेलमेट का प्रयोग करें ताकि लटकती हुई डोर से बचाव हो सके। यह त्यौहार खुशियों का है, और इसे सुरक्षित तरीके से मनाकर ही हम इसकी सार्थकता सिद्ध कर सकते हैं।