हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी निर्णायक कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम विजिलेंस की टीम ने करनाल के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उनके पंचकूला स्थित निजी निवास से की गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों और विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है।
यह पूरा मामला उस समय का है जब अनिल कुमार गुरुग्राम में तैनात थे। वहां के एक डिपो होल्डर ने विजिलेंस को दी गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि डीएफएससी उनकी रुकी हुई पेमेंट जारी करने और अन्य विभागीय कार्यों के बदले में भारी रिश्वत की मांग कर रहे थे। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि रिश्वत की मांग नकद के बजाय महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रूप में की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारी ने एक आईफोन और एक एप्पल स्मार्ट वॉच की मांग की थी, जिसे डिपो होल्डर ने दबाव में आकर उपलब्ध कराया था।
विजिलेंस की गहन जांच में यह भी उजागर हुआ है कि इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में अकेले डीएफएससी ही शामिल नहीं थे। उनके साथ विभाग के दो अन्य इंस्पेक्टरों की भी सक्रिय संलिप्तता पाई गई है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक अधिकारी ने रिश्वत के रूप में एयर कंडीशनर (AC) की मांग की थी, जबकि दूसरे ने ऑनलाइन माध्यम से नकद राशि स्वीकार की थी। इन दोनों इंस्पेक्टरों को भी जांच के दायरे में लेकर पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।
भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क का खुलासा करने वाले डिपो होल्डर ने विभाग के भीतर चल रहे ‘कमीशन राज’ की परतें भी खोली हैं। उनके अनुसार, डिपो होल्डर्स पर कुल भुगतान का लगभग 10 प्रतिशत तक कमीशन देने का निरंतर दबाव बनाया जाता था। इस अवैध राशि को डीएफएससी से लेकर निचले स्तर के अधिकारियों के बीच एक तय हिस्सेदारी के अनुसार बांटा जाता था। यदि कोई डिपो होल्डर ईमानदारी से काम करने का प्रयास करता था, तो उसे झूठे मामलों में फंसाने या उसके सरकारी भुगतान रोकने की धमकियां दी जाती थीं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ शिकायतें और साक्ष्य पहले से ही उपलब्ध थे, फिर भी उन्हें गुरुग्राम से हटाकर करनाल जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिले में तैनात किया गया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय है कि उच्च प्रशासनिक पहुंच के कारण ऐसे दागी अधिकारी लंबे समय तक कार्रवाई से बचते रहे। विजिलेंस की इस कार्रवाई को अब भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, विजिलेंस विभाग आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रहा है। जांच का मुख्य केंद्र अब रिश्वत में लिए गए उन उपकरणों की बरामदगी और विभाग में फैले अन्य संभावित घोटालों की कड़ी जोड़ना है। इस कार्रवाई के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी दागी अधिकारियों की संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीबों के हक की रक्षा की जा सके।