January 10, 2026
27 Dec 4

हरियाणा के करनाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विजिलेंस विभाग ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के जिला नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई एक डिपो होल्डर की शिकायत पर की गई है, जिसने अधिकारी पर रिश्वत के रूप में कीमती सामान मांगने के गंभीर आरोप लगाए थे। वर्तमान में करनाल में तैनात अनिल कुमार को उनके पंचकूला स्थित आवास से हिरासत में लिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि गुरुग्राम से जुड़ी है, जहाँ अनिल कुमार पूर्व में तैनात थे। गुरुग्राम के एक डिपो होल्डर रूपेश कुमार ने खुलासा किया है कि डीएफएससी ने उनकी रुकी हुई पेमेंट जारी करने और विभागीय कार्यों के बदले में रिश्वत के तौर पर नकद राशि के बजाय ‘एप्पल’ कंपनी का आईफोन और एक महंगी स्मार्ट घड़ी की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन वस्तुओं के बिल आज भी उनके नाम पर हैं, जो भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत के तौर पर विजिलेंस को सौंपे गए हैं।

इस खुलासे ने विभाग के भीतर चल रहे गहरे भ्रष्टाचार के तंत्र को भी उजागर किया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में कमीशनखोरी का एक संगठित ढांचा बना हुआ है, जिसमें कुल 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की जाती है। इसमें डीएफएससी, एएफएसओ और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की हिस्सेदारी पहले से तय होती है। आरोप है कि यदि डिपो होल्डर ईमानदारी से काम करना चाहें, तो भी उन्हें झूठे मामलों में फंसाने या स्टॉक रोकने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता है।

विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में अनिल कुमार के अलावा दो अन्य इंस्पेक्टर भी संलिप्त थे, जिन पर एसी (एयर कंडीशनर) और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रिश्वत लेने के आरोप हैं। गौरतलब है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ सबूत 2024 में ही सामने आ गए थे, लेकिन रसूख और प्रशासनिक पहुंच के चलते उनकी गिरफ्तारी में देरी हुई। इस बीच, उन पर लगे आरोपों के बावजूद उन्हें गुरुग्राम से हटाकर करनाल जैसे महत्वपूर्ण जिले में ‘मलाईदार’ पोस्टिंग दे दी गई, जो अब सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को इस विभाग की कार्यशैली का संज्ञान लेना चाहिए, ताकि गरीबों के राशन पर डाका डालने वाले अधिकारियों पर नकेल कसी जा सके। फिलहाल, विजिलेंस विभाग ने आरोपी अधिकारी का मोबाइल और अन्य गैजेट्स बरामद करने के प्रयास तेज कर दिए हैं, जिन्हें आरोपी ने जांच से बचने के लिए कथित तौर पर नष्ट करने या फेंकने की बात कही है।

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