हरियाणा में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान के तहत गुरुग्राम विजिलेंस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करनाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उनके पंचकूला स्थित आवास से की गई है। आरोपी अधिकारी पर गुरुग्राम में अतिरिक्त प्रभार के दौरान एक डिपो होल्डर से रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है।
हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस मामले में रिश्वत के तौर पर नकद राशि के बजाय महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की मांग की गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम के एक डिपो होल्डर रूपेश ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि डीएफएससी अनिल कुमार उसकी रुकी हुई पेमेंट जारी करने के बदले में रिश्वत की मांग कर रहे हैं। रिश्वत के रूप में आरोपी अधिकारी ने एप्पल कंपनी की एक स्मार्ट घड़ी और एक आईफोन मांगा था। शिकायतकर्ता द्वारा ये वस्तुएं उपलब्ध कराए जाने के बाद विजिलेंस ने पुख्ता सबूतों के आधार पर कार्रवाई शुरू की।
विजिलेंस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में केवल डीएफएससी ही शामिल नहीं थे, बल्कि उनके अधीन काम करने वाले दो अन्य इंस्पेक्टर भी संलिप्त पाए गए हैं। इनमें से एक इंस्पेक्टर प्रेम पूर्ण ने रिश्वत के रूप में एसी (एयर कंडीशनर) की मांग की थी, जबकि दूसरे अधिकारी विजय कुमार ने 35,000 रुपये नकद मांगे थे। विजिलेंस टीम ने इन दोनों इंस्पेक्टरों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, और अब मुख्य आरोपी अधिकारी अनिल कुमार को भी हिरासत में ले लिया गया है।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी अधिकारी ने रिश्वत में लिए गए उपकरणों को ठिकाने लगाने का प्रयास किया है। पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि उसने वे वस्तुएं कहीं फेंक दी हैं, जिन्हें बरामद करने के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। यह मामला वर्ष 2025 की भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पिछले कुछ समय से लगातार विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में रहा है। इससे पहले भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मंडियों में धान घोटाले और गरीबों के राशन में धांधली के मामले सामने आते रहे हैं। विजिलेंस विभाग के इस सख्त रुख ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो। फिलहाल, तीनों आरोपी अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सके।