हरियाणा के करनाल सहित पूरा नेशनल हाईवे इस समय घने कोहरे की चपेट में है। सुबह के 10 बजने के बावजूद पूरा शहर और राजमार्ग कोहरे की सफेद चादर से ढका हुआ है, जिससे दृश्यता (विजिबिलिटी) घटकर शून्य के स्तर पर पहुँच गई है। हालात ऐसे हैं कि नेशनल हाईवे पर स्थित श्रीमद्भगवत गीता द्वार जैसी विशाल संरचनाएं भी 10-15 फुट की दूरी से दिखाई नहीं दे रही हैं।
कोहरे के साथ-साथ कड़ाके की ठंड ने भी दस्तक दे दी है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और स्थानीय कारोबार पर पड़ रहा है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई है। कोहरे के कारण चालक हेडलाइट और इंडिकेटर जलाकर रेंगने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अत्यधिक धुंध के कारण घर से निकलना दूभर हो गया है और काम पर जाने वाले लोगों को काफी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। रास्तों पर विजिबिलिटी कम होने की वजह से लोग रुक-रुक कर और बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
घने कोहरे को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा विशेषज्ञों ने वाहन चालकों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे बिना लाइट और इंडिकेटर जलाए हाईवे पर न चलें, क्योंकि ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से दोपहिया और छोटे वाहन चालकों को कोहरे के दौरान अधिक सतर्क रहने को कहा गया है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, नए साल तक इसी तरह का घना कोहरा बना रह सकता है। मौसम की इस मार ने व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है; फल-सब्जियों की दुकानों और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और उन्हें गर्म कपड़ों से ढंककर रखने की सलाह दी जा रही है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह संदेश प्रसारित किया जा रहा है कि केवल अनिवार्य कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें। विजिबिलिटी जीरो होने के कारण हाईवे पर सावधानी ही सुरक्षा का एकमात्र उपाय है। जब तक मौसम में सुधार नहीं होता, तब तक यातायात नियमों का पालन और संयमित गति से वाहन चलाना ही बड़े हादसों से बचने का रास्ता है।