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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरूकुल शिक्षा से बच्चा संस्कारवान,आस्थावान,चरित्रवान,स्वाभिमानी तथा राष्ट्रपे्रमी बनता है। भारत की संस्कृति में गुरूकुल शिक्षा का विशेष योगदान रहा है, पूर्वजों की इस नीति को आगे बढ़ाते हुए गुरूकुल नीलोखेड़ी बच्चों की शिक्षा में नैतिकता को बढ़ाने में सहयोग कर रहा है।
राज्यपाल रविवार को गुरूकुल नीलोखेड़ी में वार्षिकोत्सव के अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इससे पहले महामहिम राज्यपाल सहित गुरूकुल के निदेशक जगदीश आर्य,ओकाया कम्पनी के प्रबंधक सुबोध गुप्ता,राज्यपाल की धर्मपत्नी दर्शना देवी,डा०राजेन्द्र विद्यालंकार, शिवकुमार, प्रधानाचार्य जितेन्द्र, मुख्याध्यापक अर्जुन देव ने  दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम की शुरूआत की।
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज की आधुनिक शिक्षा केवल शिक्षा तक ही सीमित रह गई है। विद्यार्थी केवल अच्छे अंक प्राप्त करने की दौड़ में प्रतिष्ठित संस्थानों में पढऩा पसंद करते है,परन्तु शिक्षा से पहले बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए संस्कार जरूरी है। जब बच्चा संस्कारी होगा तो विकास के रास्ते अपने-आप खुल जाएंगे। उन्होंने माता-पिता को याद दिलाया कि हमें स्वामी श्रद्धानंद जी,स्वामी दयानंद जी के पदचिन्हों पर चल करके अपने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारवान बनाना होगा। यह सभी केवल गुरूकुल शिक्षा के तहत ही संभव हो सकती है।
गुरूकुल के निदेशक जगदीश आर्य ने आऐ हुए सभी मेहमानों का स्वागत किया ।
उन्होंने बच्चों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और दिन-रात मेहनत करने की प्रेरणा भी दी। राज्यपाल ने शिक्षा व खेलों में उत्कृष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस मौके पर  गुरूकुल के शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को भी राज्यपाल ने सम्मानित किया।
  वार्षिकोत्सव के दौरान छात्रों ने स्वागत गीत से महामहिम आचार्य दवेव्रत व अन्य मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। गुरूकुल के छात्रों द्वारा परेड का सुंदर प्रदर्शन किया तथा सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, सर्वांग सुन्दर व्यायाम, योगा, दंड बैठक, हास्य नाटक का मंचन आदि बहुत ही आकर्षक प्रस्तुतियां थी। सबसे आकर्षक प्रस्तुति विद्यार्थियों ने मल्लखमब के रूप में दी। इस मौके पर स्कूल के विद्यार्थी,अभिभावक व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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