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अतिरिक्त उपायुक्त यादव ने मगंलवार को अपने कार्यलय मे कृषि,राजस्व,पंचायत विकास विभाग तथा प्रदूषण नियत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि इस बार जिला में धान की पराली को जलाने वालो के विरूद्ध सख्त कानूनी कारवाई अमल में लाए और अपने-अपने विभाग के अधिकारियों  व कर्मचारियों को आदेश दें कि वह पराली जलाने वालों की रिपोर्ट प्रतिदिन कृषि विभाग को भेजें।
अतिरिक्त उपायुक्त यादव धान की पराली को जलाने की रोकथाम के लिए जिला में किए गए प्रबंधों को लेकर कृषि ,राजस्व,पंचायत विकास विभाग,प्रदूषण नियत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैंठक लें रहे थे। उन्होनें कहा कि गेहूं व धान के फानों/अवशेषों को जलाना पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन है। ईपीसी एक्ट 1981 की धारा 188 के तहत सजा व जुर्माना भी हो सकता है। अगर कोई पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति से दो एकड़ भूमि तक 2500 रूपये,दो एकड़ से पांच एकड़ भूमि तक 5000 रूपये तथा पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा ।
उन्होंने जिला के किसानों से अपील की है कि वे फसलों के अवशेष ना जलाएं और ना ही दूसरों को जलाने दें, किसान नई तकनीकों का प्रयोग करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन उपाये अपनाएं,पर्यावरण को प्रदूषण से बचाए तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं।
बैठक में  उप-कृषि निदेशक डा० प्रदीप मील ने बताया कि पिछले दिनों नीति आयोग भारत सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से गेंहू और धान के अवशेषों को जलाने की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा की थी, उनके आदेशों की अनुपालना में जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और उपायुक्त डा०आदित्य दहिया द्वारा फसलों के अवशेष जलाने की रोकथाम को लेकर जिला में धारा-144 भी लागू कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष भी पराली जलाने वाले 203 किसानों की एफआईआर दर्ज करवाई गई थी तथा करीब 4 लाख रूपये जुर्माने की राशि वसूल की गई थी।
इस अवसर पर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कुलभूषण बंसल, एएपीओ शशीपाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ वीरेन्द्र पुनिया, सभी तहसीलदार, बीडीपीओज़ आदि उपस्थित थे।

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