उत्तर प्रदेश सीमा के निकटवर्ती मुस्तफाबाद गांव में आज सुबह एक भीषण हादसा होते-होते टल गया, जिसने क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते डंपरों के आतंक को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सुबह तड़के रेत से लदा एक विशालकाय डंपर अनियंत्रित होकर गांव के पूजनीय स्थल ‘खेड़ा बाबा’ पर पलट गया। इस हादसे में स्थल की ग्रिल और दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। गनीमत यह रही कि हादसा सुबह के उस वक्त हुआ जब वहां श्रद्धालु मौजूद नहीं थे, अन्यथा एक बड़ी जनहानि निश्चित थी।
हादसे की सूचना मिलते ही पूरा मुस्तफाबाद गांव मौके पर एकत्रित हो गया। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर दिन-रात माइनिंग के डंपर हाई स्पीड में दौड़ते हैं, जिससे बच्चों का स्कूल जाना और गलियों में निकलना दूभर हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दुर्घटनाग्रस्त डंपर और वहां खड़े अन्य ट्रकों पर नंबर प्लेट ही नहीं थी। कुछ ट्रकों पर यदि नंबर प्लेट थी भी, तो उन पर ग्रीस या मिट्टी लगाकर नंबरों को जानबूझकर छुपाया गया था ताकि किसी भी हादसे की स्थिति में उनकी पहचान न हो सके।
स्थानीय महिलाओं ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रात भर ये ‘दो नंबर’ की गाड़ियां बिना किसी खौफ के चलती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इन डंपरों की चपेट में आने से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन माइनिंग माफिया और रसूखदार ठेकेदारों के डर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक इस रास्ते से ट्रकों का आवागमन पूरी तरह बंद नहीं किया जाता और अवैध माइनिंग पर लगाम नहीं लगती, वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
हादसे की जानकारी मिलते ही सदर थाना पुलिस और माइनिंग विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि सड़क किनारे खड़े एक खराब ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में और कच्ची मिट्टी धंसने के कारण यह डंपर पलट गया। पुलिस ने ग्रामीणों को शांत करते हुए आश्वासन दिया है कि बिना नंबर प्लेट के चलने वाले वाहनों के खिलाफ आरटीओ विभाग को पत्र लिखकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, खेड़ा बाबा स्थल को हुए नुकसान की भरपाई भी ठेकेदार के माध्यम से करवाई जाएगी।
गांव के सरपंच ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ठेकेदार ने अपनी गलती स्वीकार की है और भविष्य में इस रास्ते से ट्रकों को न निकालने का वादा किया है। हालांकि, सरपंच ने इस बात पर जोर दिया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, क्योंकि बिना नंबर के वाहन चलाना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है। रात के अंधेरे में माइनिंग माफिया जिस तरह से नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं, उससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आम नागरिक की जान भी हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इन ‘अदृश्य’ नंबर वाले डंपरों पर कैसे लगाम लगाता है। मुस्तफाबाद के ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने बच्चों और गांव की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। पुलिस और माइनिंग विभाग के दावों की हकीकत आने वाले दिनों में साफ होगी कि क्या वाकई इन ‘मौत के डंपरों’ पर ब्रेक लगेगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।