हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाने के उद्देश्य से वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह इन दिनों प्रदेश भर में ‘सद्भावना यात्रा’ के माध्यम से सक्रिय हैं। हाल ही में करनाल पहुंचे बीरेंद्र सिंह का कार्यकर्ताओं और पूर्व विधायकों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आने का एकमात्र ध्येय हरियाणा में पार्टी को एक नई दिशा और मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने संकल्प जताया कि अगले छह महीने से एक साल के भीतर वह कांग्रेस को एक नए और विशाल स्वरूप में जनता के सामने पेश करेंगे।
बीरेंद्र सिंह ने इस यात्रा की पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए बताया कि इसकी प्रेरणा राहुल गांधी की 4000 किलोमीटर लंबी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से मिली है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ ताकतें धर्म, संप्रदाय और जाति के नाम पर समाज को बांटने और आपसी भाईचारे को ठेस पहुंचाने का काम कर रही हैं। इसी नफरत के माहौल को प्रेम और सद्भाव में बदलने के लिए बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में हरियाणा के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में यह यात्रा निकाली जा रही है। बीरेंद्र सिंह के अनुसार, हरियाणा की संस्कृति हमेशा से ‘मिल-बैठकर रहने’ और ‘साझा भाईचारे’ की रही है, जिसे वर्तमान राजनीतिक माहौल प्रदूषित करने का प्रयास कर रहा है।
यात्रा की प्रगति का विवरण देते हुए उन्होंने साझा किया कि अब तक 57 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जा चुका है। आगामी 6 अप्रैल से कैथल से यात्रा का पांचवा अध्याय शुरू होगा, जिसमें नीलोखेड़ी, इंद्री और असंध जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। यात्रा का समापन 5 मई तक होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि एक बड़ी सामाजिक चेतना है, जिससे न केवल वकील, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे प्रबुद्ध वर्ग जुड़ रहे हैं, बल्कि प्रदेश के साढ़े तीन लाख सरकारी कर्मचारी भी इसे उम्मीद की नजर से देख रहे हैं।
पार्टी के भीतर गुटबाजी और आधिकारिक पद के सवालों पर बेबाकी से जवाब देते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेताओं से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के समर्पण से मजबूत होती है। उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पक्ष केवल दो धड़े बनाकर वोट हासिल करना चाहता है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। राज्यसभा जाने या मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब किसी मंत्री पद या चुनाव की लालसा नहीं रखते, बल्कि उनका पूरा ध्यान कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता को सक्रिय कर पार्टी को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इसका निर्णय उन्होंने पूरी तरह से आलाकमान और चुने हुए विधायकों पर छोड़ दिया।
अंत में, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि किसान, बेरोजगार युवा और छोटा व्यापारी आज सरकार की नीतियों से त्रस्त है। उन्होंने संविधान पर खतरे और हालिया ट्रेड डील्स का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार मतदाताओं को इस कदर मजबूर करना चाहती है कि वे मदद के लिए उनके पास भीख मांगें। हालांकि, उन्होंने गर्व से कहा कि हरियाणा का मतदाता स्वाभिमानी है और वह अपनी लड़ाई लड़ना बखूबी जानता है, जिसका परिणाम आगामी चुनावों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।