March 18, 2026
18 March 11

हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के परिणामों के बाद एक बार फिर भूचाल आ गया है। 16 मार्च को हुए राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासी सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के वरिष्ठ नेताओं ने एक अहम प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले किए गए। प्रेस वार्ता के दौरान प्रमुख मुद्दा लोकतंत्र की मर्यादा और चुनावों में धनबल के अनैतिक प्रयोग का रहा।

बैठक को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि वर्तमान में जिस प्रकार की बातें और सूचनाएं सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। आरोप लगाया गया कि भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए 25-25 करोड़ रुपये में एक-एक विधायक को खरीदकर लोकतंत्र की हत्या करने का काम किया है। इस दौरान देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के उस दौर को याद किया गया जब उनकी सरकार मात्र एक वोट से गिर गई थी। वाजपेयी जी ने तब कहा था कि मंडी में माल बहुत बिकाऊ था लेकिन कोई खरीदार नहीं था। आज की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत बताई गई, जहाँ नैतिकता को ताक पर रखकर ‘साम, दाम, दंड, भेद’ का सहारा लिया जा रहा है।

चुनाव के तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया गया कि बीजेपी की ओर से संजय भाटिया और बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल मैदान में थे, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बोध को अपना उम्मीदवार बनाया था। नतीजों के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इसमें मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दोनों ही विफल साबित हुए हैं। विशेष रूप से कांग्रेस के भीतर मचे घमासान पर कटाक्ष करते हुए कहा गया कि हुड्डा ‘जीतकर भी चुनाव हार गए’।

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए प्रेस वार्ता में कहा गया कि चुनाव से पहले कांग्रेस के 37 विधायकों को किसी प्रकार की सेंधमारी से बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश में एक तरह से ‘बंदी’ बनाकर रखा गया था। इसके बावजूद, जब मतदान का समय आया, तो कांग्रेस के पाँच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और चार विधायकों की वोटें रद्द करवा दी गईं। यह घटनाक्रम कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा की उपस्थिति में हुआ। नेताओं ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है; इससे पहले भी राज्यसभा चुनाव में 14 विधायकों की पेन की स्याही बदलवाकर कांग्रेस के उम्मीदवार को हरवाया गया था। आरोप लगाया गया कि यह सब भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मर्जी और बीजेपी के साथ उनकी कथित मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।

इस पूरे प्रकरण में जननायक जनता पार्टी ने अपनी पीठ थपथपाते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की ‘मैनेजमेंट स्किल’ और नेतृत्व क्षमता की सराहना की। नेताओं ने कहा कि जब जेजेपी के पास 10 विधायक थे और कार्तिकेय शर्मा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े थे, तब दुष्यंत चौटाला ने अपने सभी 10 विधायकों की एकजुटता सुनिश्चित की थी और कार्तिकेय शर्मा की जीत सुनिश्चित की थी। जेजेपी के अनुसार, असली लीडरशिप वह है जहाँ संगठन में कोई सेंध न लगा सके।

प्रेस वार्ता में यह भी मांग की गई कि जिन विधायकों ने गद्दारी की है या गलत निशान लगाकर जानबूझकर अपनी वोट रद्द करवाई है, उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। राव गोकुल सेतिया के उस फैसले का स्वागत किया गया जिसमें उन्होंने चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना देने की बात कही है ताकि इन ‘गद्दारों’ के चेहरे जनता के सामने आ सकें। जनता ने इन विधायकों को कांग्रेस के नाम पर वोट दिया था, और अब यह विश्वासघात सीधे तौर पर मतदाताओं के साथ हुआ है।

अंत में, प्रदेश की भविष्य की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि आने वाला समय जननायक जनता पार्टी और युवा नेतृत्व का है। हाल ही में जुलाना और हांसी में हुई रैलियों में उमड़ी भीड़ को इसका प्रमाण बताया गया। बीजेपी को कांग्रेस की और कांग्रेस को बीजेपी की ‘बी टीम’ बताते हुए जेजेपी ने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब इन दोनों पारंपरिक दलों के खेल को समझ चुकी है और बदलाव के लिए तैयार है।

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