हरियाणा के करनाल में न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने और अदालत को गुमराह करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करनाल पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है जो पेशेवर रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालतों में जमानत दिलाने का काम करता था। यह गिरफ्तारी उस समय संभव हुई जब आरोपी एक बार फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत कक्ष में मौजूद था।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अश्वनी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पानीपत जिले के तामसाबाद का रहने वाला है। अश्वनी का काम करने का तरीका (मॉडस ऑपरेंडी) बहुत ही शातिर था। वह अपने आधार कार्ड के अंकों को तकनीकी रूप से बदलकर नए दस्तावेज तैयार करता था। ऐसा वह इसलिए करता था ताकि जब कोर्ट के पोर्टल पर उसके रिकॉर्ड की जांच की जाए, तो वह एक नया व्यक्ति प्रतीत हो और यह पता न चल सके कि उसने पहले भी कई अन्य मामलों में जमानत दी हुई है। कानूनन एक व्यक्ति सीमित मामलों में ही जमानत दे सकता है, लेकिन अश्वनी ने इसे अपना व्यवसाय बना लिया था।
इस घटनाक्रम का खुलासा उस समय हुआ जब आरोपी करनाल की एसीएस (ACS) कोर्ट में एक मामले की जमानत देने के लिए पहुंचा था। जमानत की प्रक्रिया के दौरान जब कोर्ट के पोर्टल पर उसके दस्तावेजों और नाम की गहनता से जांच की गई, तो सिस्टम ने उसके पुराने रिकॉर्ड को पकड़ लिया। दस्तावेजों में हेरफेर और बार-बार जमानत देने की इस संदिग्ध गतिविधि को देखते हुए जज साहब ने तुरंत संज्ञान लिया। जज के आदेश पर सेक्टर-13 चौकी इंचार्ज और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को अदालत कक्ष से ही हिरासत में ले लिया।
जांच अधिकारी और सब-इंस्पेक्टर गौरव ने बताया कि आरोपी से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह करनाल के अलावा पानीपत और सोनीपत की अदालतों में भी इसी तरह आधार कार्ड के नंबर बदलकर फर्जी जमानती बन चुका है। वह अदालतों के बाहर एक दलाल के रूप में सक्रिय रहता था और जरूरतमंद लोगों से पैसे लेकर उनकी जमानत की जिम्मेदारी लेता था। पुलिस अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कुल कितने लोगों की जमानत करवाई है और इस गिरोह में उसके साथ और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। पुलिस उन फाइलों और दस्तावेजों को भी खंगाल रही है जो आरोपी द्वारा अन्य मुकदमों में जमा कराए गए थे।
इस गिरफ्तारी के बाद करनाल पुलिस ने आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और अपील जारी की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोग अक्सर जल्दबाजी में या किसी दलाल के बहकावे में आकर ऐसे फर्जी जमानतियों का सहारा लेते हैं। यह न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि भविष्य में आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। यदि कोई जमानती फर्जी पाया जाता है, तो न केवल उसकी जमानत रद्द हो जाएगी, बल्कि जिस व्यक्ति की जमानत हुई है, उसके खिलाफ भी धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज पेश करने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
अदालती कार्यवाही में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि जमानत की प्रक्रिया के लिए केवल अपने विश्वसनीय रिश्तेदारों, मित्रों या जानकारों का ही सहयोग लें। आरोपी अश्वनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का विशेष अभियान अब उन दलालों पर भी केंद्रित है जो अदालतों के बाहर सक्रिय रहकर न्याय प्रणाली को चुनौती दे रहे हैं।