करनाल: हरियाणा के करनाल जिले में धान घोटाले को लेकर अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई अमल में लाई गई है। करनाल पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए विभिन्न विभागों के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन अधिकारियों पर आपसी मिलीभगत से सरकारी पद का दुरुपयोग करने और फर्जी गेट पास के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए हैं कि इंद्री, असंध, तरावड़ी और निसिंग जैसी प्रमुख मंडियों में धान की खरीद और भंडारण की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं। गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में इंद्री के हरियाणा वेयर हाउसिंग से जुड़े तकनीकी सहायक प्रदीप कुमार, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर रणधीर सिंह, तरावड़ी के इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, असंध के हैफेड मैनेजर प्रमोद कुमार और निसिंग के हैफेड मैनेजर दर्शन सिंह शामिल हैं।
एसआईटी की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इन अधिकारियों ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर फर्जीवाड़ा किया। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शनिवार तड़के इन अधिकारियों को उनके आवास से हिरासत में लिया। इस घोटाले की जांच का नेतृत्व कर रही आईपीएस अधिकारी और करनाल की एएसपी कांशी सिंघल ने बताया कि यह कार्रवाई रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
यह पहला मौका है जब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हैफेड के इतने बड़े अधिकारियों पर इस तरह की सीधी गाज गिरी है। वर्षों से चल रहे इन घोटालों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले समय में कुछ अन्य विभागों के अधिकारियों और मंडी सचिवों की गिरफ्तारी की भी संभावना जताई जा रही है, जो फिलहाल अग्रिम जमानत पर बाहर हैं। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुँचने के लिए अधिकारियों की बेनामी संपत्तियों की जांच की मांग भी उठने लगी है।