करनाल: केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्वरूप में किए गए बदलावों और इसके नाम परिवर्तन को लेकर कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में करनाल के जिला सचिवालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने एकत्रित होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी (डीसी) के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत ग्राम योजना’ (वीबी ग्राम) करने का जो निर्णय लिया है, वह न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है। नेताओं का तर्क है कि नई योजना में बजट के आवंटन का 60:40 का अनुपात (60% केंद्र और 40% राज्य) राज्यों की वित्तीय स्थिति को और खराब करेगा। उनका कहना है कि हरियाणा जैसे राज्य, जो पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं, 40% हिस्सा वहन नहीं कर पाएंगे, जिससे अंततः यह योजना दम तोड़ देगी।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि मनरेगा ने कोरोना काल जैसी आपदा के समय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभाला था। अब सरकार ‘गारंटी’ शब्द को हटाकर और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देकर मजदूरों के पेट पर लात मार रही है। नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि अब रोजगार देने का अधिकार ग्राम पंचायतों से छीनकर केंद्र सरकार और पीएमओ के पास केंद्रित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता प्रभावित होगी।
इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने डिजिटल उपस्थिति (NMMS ऐप) और भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल नहीं किया और ग्रामीण मजदूरों के हितों की रक्षा नहीं की, तो यह आंदोलन जिला स्तर से बढ़कर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और भी उग्र रूप धारण करेगा।