करनाल: बदलता मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें अस्थमा और सांस संबंधी समस्याएं सबसे प्रमुख हैं। इन बीमारियों से लंबे समय से जूझ रहे मरीजों के लिए करनाल का मॉडल टाउन स्थित डॉ. शारदा आयुर्वेदा अस्पताल आशा की एक नई किरण बनकर उभरा है। यहां न केवल हरियाणा, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से मरीज अपनी पुरानी बीमारियों का आयुर्वेदिक उपचार करवाने पहुंच रहे हैं।
अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों ने अपने अनुभवों के माध्यम से आयुर्वेद की प्रभावशीलता पर मुहर लगाई है। इंद्री से आए एक मरीज ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से सांस फूलने और छाती में दर्द की समस्या से बेहद परेशान थे। उन्होंने कई जगह इलाज करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। डॉ. शारदा आयुर्वेदा में मात्र दो महीने के उपचार के बाद अब वे पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं और उन्हें चलने-फिरने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
इसी तरह उत्तर प्रदेश के बागपत से आई एक महिला मरीज ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में काफी दिक्कत होती थी और सांस की समस्या के कारण जीवन दूभर हो गया था। उन्होंने बताया कि डेढ़ साल से वे अलग-अलग डॉक्टरों के चक्कर लगा रही थीं, लेकिन यहां की आयुर्वेदिक दवाओं ने चमत्कारिक असर दिखाया है। अब वे बिना किसी परेशानी के अपना दैनिक कार्य कर पा रही हैं।
डॉ. शारदा आयुर्वेदा संस्थान की पहचान उसके अनुभवी डॉक्टरों और शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियों से है। संस्थान की शाखाएं हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में भी फैली हुई हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि आयुर्वेद न केवल बीमारी के लक्षणों को दबाता है, बल्कि जड़ से उसका समाधान करने का प्रयास करता है, ताकि मरीज को स्थायी राहत मिल सके।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अस्थमा जैसी गंभीर स्थिति में भी अगर सही समय पर प्राकृतिक उपचार शुरू किया जाए, तो सकारात्मक परिणाम निश्चित हैं। भारी संख्या में मरीजों की उपस्थिति और उनके संतुष्ट चेहरे इस बात का प्रमाण हैं कि लोग एक बार फिर प्राचीन चिकित्सा पद्धति की ओर लौट रहे हैं। यदि आपके परिवार में भी कोई अस्थमा या पुरानी सांस की बीमारी से ग्रसित है, तो डॉ. शारदा आयुर्वेदा एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में सामने है।