हरियाणा की ऐतिहासिक कर्ण नगरी करनाल में आज भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शिवभक्तों द्वारा आयोजित एक भव्य प्रभात फेरी ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया। सुबह की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं का हुजूम सड़कों पर उमड़ पड़ा, जहाँ चारों ओर भगवान भोलेनाथ के जयकारे और भजनों की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी। इस धार्मिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन-जन तक धर्म और अध्यात्म का संदेश पहुँचाना रहा।
कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक पूजा-अर्चना और ‘ओम नमः शिवाय’ के सामूहिक जाप के साथ हुआ। डमरू की थाप पर थिरकते भक्तों ने वातावरण में एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। ‘भोले बाबा का डमरू बाजेगा’ जैसे लोकप्रिय भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। प्रभात फेरी के दौरान ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे’ के महामृत्युंजय मंत्रोच्चार से न केवल धार्मिक अनुष्ठान की गरिमा बढ़ी, बल्कि उपस्थित लोगों ने भगवान शंकर का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए भक्तों ने गंगा जल, अक्षत, चंदन और पुष्पों से भगवान का अभिषेक किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिव प्रेम की भावना को प्रत्येक घर में जगाने का आह्वान किया। आयोजन के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही, जिसमें युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने समान उत्साह के साथ हिस्सा लिया। भक्तों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है।
विशेष रूप से, इस अवसर पर धर्म के संदेश को डिजिटल युग के साथ जोड़ने की बात भी कही गई। आयोजकों ने बताया कि प्रभात फेरी की इन स्मृतियों और धार्मिक संदेशों को विभिन्न सोशल मीडिया मंचों जैसे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के माध्यम से भी प्रसारित किया जा रहा है, ताकि जो लोग शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके, वे भी घर बैठे प्रभु की कृपा और आशीर्वाद पा सकें। अंत में, ऊंचे हाथ उठाकर किए गए शिव के जयघोष और जय वीर बजरंगी के नारों के साथ इस भव्य आध्यात्मिक यात्रा का समापन हुआ।