पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के चुनावों को लेकर आज वकीलों के बीच भारी उत्साह और गहमागहमी का माहौल है। वकीलों के इस लोकतांत्रिक महापर्व की शुरुआत सुबह से ही हो गई, जिसमें करनाल सहित पूरे पंजाब और हरियाणा की जिला अदालतों और उप-मंडल अदालतों के अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। गौरतलब है कि चंडीगढ़ और वहां की जिला अदालत में मतदान की प्रक्रिया कल ही संपन्न हो चुकी है, जबकि आज अन्य सभी केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। शाम 5:00 बजे तक चलने वाली इस वोटिंग प्रक्रिया में अधिवक्ता अपने भविष्य के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
इस बार के चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बार काउंसिल के चुनावी मैदान में इस बार कुल 157 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वकीलों के बीच बातचीत के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जो चुनाव सामान्यतः हर 5 साल में होने चाहिए थे, वे इस बार विभिन्न कारणों और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते लगभग 7 साल बाद आयोजित हो रहे हैं। इस लंबे अंतराल के बाद हो रहे चुनाव ने अधिवक्ताओं के बीच जोश को दोगुना कर दिया है। चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवार और उनके समर्थक सुबह से ही अदालतों के प्रवेश द्वारों पर मुस्तैद हैं और अपने पक्ष में प्रथम वरीयता (First Preference) के वोट के लिए अपील कर रहे हैं।
करनाल बार एसोसिएशन के कई प्रमुख चेहरे इस चुनावी रण में शामिल हैं। संदीप चौधरी, जिनका सीरियल नंबर 83 है, ने अपनी उम्मीदवारी पेश करते हुए वकीलों से उनके कार्य और मेहनत के आधार पर वोट देने का आग्रह किया है। वहीं, वीरेंद्र सिंह जिनका बैलेट नंबर 39 है, अपनी चार बार की प्रधानी और ईमानदार छवि के दम पर मैदान में हैं। राजकुमार चौहान, जो 2019 में भी बार काउंसिल के सदस्य निर्वाचित हुए थे, एक बार फिर वकीलों के विश्वास पर खरे उतरने की उम्मीद के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। सोनिया तंवर, जो करनाल बार से एकमात्र महिला उम्मीदवार के रूप में बैलेट नंबर 95 पर चुनावी मैदान में हैं, महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण का चेहरा बनकर उभरी हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि यदि कोई महिला जीतकर जाती है, तो यह बार के गौरव को और बढ़ाएगा।
एक अन्य प्रमुख नाम सुवीर सिद्धू का है, जिनका सीरियल नंबर 117 है। उनके समर्थकों ने उनके पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि वे बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के सबसे युवा चेयरमैन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण और वकीलों के हितों के लिए कई महत्वपूर्ण आवाजें उठाई हैं। इसके अलावा, कुरुक्षेत्र बार के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र जुनेजा भी चुनावी मैदान में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। उम्मीदवारों के समर्थकों का कहना है कि यह चुनाव केवल हार-जीत का नहीं, बल्कि भाईचारे और वकीलों के अधिकारों की रक्षा का है।
चुनाव की तकनीकी बारीकियों और नतीजों के समय को लेकर भी अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मतदान के बाद मतपेटियों को सुरक्षित रखा जाएगा और 20 तारीख से मतों की गिनती शुरू होने की संभावना है। चूंकि यह चुनाव प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम (वरीयता के आधार पर मतदान) के तहत होता है, इसलिए इसकी गणना काफी जटिल और समय लेने वाली होती है। पिछली बार की तुलना में इस बार मतदाताओं की संख्या में भी भारी वृद्धि देखी गई है। पिछली बार जहां लगभग 46,000 वोट पड़े थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा 75,000 से 80,000 तक पहुँचने की उम्मीद है। वोटों की इस विशाल संख्या और गणना की जटिलता को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि मतगणना की प्रक्रिया में लगभग 40 दिन का समय लग सकता है। अंतिम परिणाम अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह में आने की उम्मीद है।
वकीलों ने इस चुनाव को पूर्णतः शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने पर जोर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपील की है कि सभी साथी अपनी सूझबूझ से ऐसे उम्मीदवारों को चुनें जो बार के हितों को सर्वोपरि रखें और जो हर परिस्थिति में वकीलों के साथ खड़े हों। स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है ताकि वे अपनी बार की समस्याओं को बार काउंसिल में प्रभावी ढंग से उठा सकें। मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही वकीलों की लंबी कतारें देखी गईं, जो यह दर्शाती हैं कि अधिवक्ता अपने इस अधिकार को लेकर कितने सजग हैं। यह चुनाव आने वाले वर्षों में पंजाब और हरियाणा के हजारों वकीलों के भविष्य और बार काउंसिल की कार्यशैली को नई दिशा प्रदान करेगा।