हरियाणा के करनाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन’ किए जाने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शहर के महात्मा गांधी चौक पर राष्ट्रपिता की प्रतिमा के समक्ष बड़ी संख्या में कांग्रेस जन एकत्रित हुए और सुबह 11:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक सांकेतिक उपवास रखा।
कांग्रेस के जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेताओं ने इस बदलाव को केवल नाम का परिवर्तन नहीं, बल्कि योजना की ‘मूल आत्मा’ पर प्रहार बताया है। उनके अनुसार, 2005 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य आधार काम की गारंटी, वेतन की गारंटी और जवाबदेही था। नए नियमों के तहत अब रोजगार की गारंटी को कमजोर कर दिया गया है। नेताओं का आरोप है कि पहले ग्रामीण अपनी ग्राम पंचायत से सीधे काम मांग सकते थे, लेकिन अब दिल्ली और केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किस गांव में काम होगा और किसमें नहीं।
आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में पंजीकृत लाखों मजदूरों में से केवल कुछ हजार को ही काम मिल पाया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि रोजगार के दिनों को कागजों पर भले ही बढ़ा दिया गया हो, लेकिन जमीन पर मजदूरों को औसतन 40 दिन का काम भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, योजना के फंडिंग पैटर्न में बदलाव करते हुए राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ डालने की भी आलोचना की गई, जिससे पहले से कर्ज में डूबी राज्य सरकारों के लिए इस योजना को लागू करना कठिन हो जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने इस कदम को महात्मा गांधी के अपमान से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा सरकार गांधीवादी विचारधारा के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह किसानों ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर किया था, उसी तरह कांग्रेस भी मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल कराने के लिए 45 दिनों तक देशव्यापी संघर्ष जारी रखेगी। आने वाले दिनों में यह आंदोलन ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा, जहाँ ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित करवाकर केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।