February 4, 2026
10 Jan 6

करनाल के करण विहार निवासी 10 वर्षीय यमन संधू ने बॉक्सिंग की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है। पांचवीं कक्षा के छात्र यमन ने हरिद्वार में आयोजित नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देश भर के 400 प्रतिभागियों को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यमन डीएवी स्कूल सेक्टर-13 के छात्र हैं और उनकी इस सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा स्कूल प्रबंधन और मोहल्ला बेहद गौरवान्वित है।

यमन की यह जीत उनके अटूट परिश्रम और जुनून का परिणाम है। उनके पिता बताते हैं कि यमन पिछले चार वर्षों से बॉक्सिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका अनुशासन ऐसा है कि वह सूरज निकलने से पहले सुबह 4:30 बजे उठ जाते हैं और प्रैक्टिस के लिए एकेडमी पहुंच जाते हैं। यमन ने बताया कि उन्हें बॉक्सिंग में रुचि थी और वह अपने कोच जैसा बनना चाहते हैं। उनका मानना है कि सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता और पूरी मेहनत व ईमानदारी से ही लक्ष्य पाया जा सकता है।

यमन की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं को पार करते हुए नेशनल लेवल पर अपनी जगह बनाई। डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल आशा मैम ने बताया कि यह स्कूल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। 1200 से अधिक स्कूलों के नेटवर्क में यमन ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे बच्चों को खेलों के लिए उचित मंच प्रदान करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहते हैं, ताकि नन्हे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकें।

जीत के बाद जब यमन अपने घर पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों के साथ एक भव्य रैली निकाली गई और पूरे मोहल्ले ने सड़कों पर उतरकर अपने नन्हे चैंपियन को फूल मालाओं से लाद दिया। स्थानीय पार्षद भूपेंद्र नोदना ने भी यमन को बधाई दी और विश्वास दिलाया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से खिलाड़ियों को हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने करनाल में एक बेहतर स्टेडियम बनाने की योजना के बारे में भी जानकारी साझा की ताकि भविष्य में और भी खिलाड़ी निखर सकें।

यमन संधू की यह कहानी उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। 10 साल की छोटी सी उम्र में नेशनल गोल्ड जीतकर यमन ने साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और मेहनत में सच्चाई हो, तो आकाश छूना नामुमकिन नहीं है। अब यमन का अगला लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिंग में उतरकर देश के लिए पदक जीतना है।

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