करनाल पुलिस की सीआईए-1 शाखा ने शहर के सेक्टर-16 इलाके में हुई एक बड़ी लूट की गुत्थी को सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गत 3 जनवरी को हुई इस वारदात में एक सर्राफा व्यापारी से करीब डेढ़ किलो सोना और 15 लाख रुपये की नकदी लूट ली गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए न केवल आरोपियों को दबोचा, बल्कि लूटे गए माल का एक बड़ा हिस्सा भी बरामद कर लिया है।
वारदात का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि पीड़ित व्यापारी की दुकान के पास काम करने वाला पड़ोसी कर्मचारी प्रिंस शर्मा निकला। प्रिंस और उसके साथी दिनेश शर्मा, जो झंडला गेट के रहने वाले हैं, ने जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस लूट की योजना बनाई थी। क्योंकि वे व्यापारी से अच्छी तरह परिचित थे और जानते थे कि वह प्रतिदिन सोना गलाई का काम करने के बाद भारी मात्रा में कीमती सामान लेकर घर लौटते हैं, इसलिए उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए बाहरी लोगों को इस काम में शामिल किया।
साजिश के तार विदेशों से भी जुड़े पाए गए हैं। प्रिंस ने पुर्तगाल में रह रहे अपने जीजा विजय से संपर्क किया, जिसने अंबाला निवासी प्रवीण गुर्जर और प्रतीक को इस गिरोह से जोड़ा। घटना वाले दिन आरोपियों ने पहले इलाके की रेकी की और जैसे ही व्यापारी सेक्टर-16 के कम्युनिटी सेंटर के पास पहुंचे, आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। व्यापारी की स्कूटी गिराने के बाद उनके सिर पर गंभीर वार किए गए और कीमती सामान से भरा बैग छीनकर आरोपी फरार हो गए।
पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की सहायता से आरोपियों की पहचान की। करनाल से प्रिंस और दिनेश को गिरफ्तार किया गया, जबकि प्रवीण और प्रतीक को अंबाला के पास बोह गांव से काबू किया गया। पुलिस ने अब तक आरोपियों के कब्जे से करीब 1.25 किलो सोना (जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये है) और कुछ नकदी बरामद की है। वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है।
पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में गठित पांच टीमों ने इस संवेदनशील मामले को सुलझाया। आरोपियों में से एक प्रतीक का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है, जो नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त रहा है। पुलिस अब आरोपियों को अदालत में पेश कर पांच दिन का रिमांड हासिल करने का प्रयास करेगी ताकि शेष नकदी और वारदात में इस्तेमाल किए गए अन्य वाहनों को बरामद किया जा सके। इस कार्रवाई से स्थानीय व्यापारियों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है।