हरियाणा के करनाल जिले में कोऑपरेटिव बैंक के बाहर पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बैंक के जनरल मैनेजर (जीएम) पर तानाशाही और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान प्रशासन उनके हितों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
वेतन में भारी कटौती मुख्य मुद्दा प्रदर्शन कर रहे पैक्स कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि कई कर्मचारी जो 30-35 सालों से काम कर रहे हैं और 60,000 से 65,000 रुपये तक वेतन ले रहे थे, उनके वेतन को अचानक घटाकर 22,000 से 32,000 रुपये के बीच फिक्स कर दिया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि इस मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की डबल बेंच का स्थगन आदेश (स्टे) होने के बावजूद जनरल मैनेजर इसे मानने से इनकार कर रहे हैं। कर्मचारियों ने इसे सीधे तौर पर अदालती आदेशों की अवमानना और कर्मचारियों का मानसिक व आर्थिक शोषण करार दिया है।
नियमों के विरुद्ध नियुक्तियों का विरोध वेतन कटौती के अलावा, कर्मचारियों में नियुक्तियों को लेकर भी गहरा रोष है। यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि बैंक के लगभग 70 वर्ष की आयु वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पैक्स में प्रबंधक के पदों पर नियुक्त किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार इन पदों पर केवल पैक्स के मौजूदा कर्मचारियों की ही पदोन्नति होनी चाहिए। रजिस्ट्रार के स्थगन आदेश के बावजूद इन नियुक्तियों को जारी रखने को लेकर कर्मचारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासनिक रवैये पर सवाल यूनियन के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले छह महीनों से अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे जनरल मैनेजर कर्मचारियों से बात करने को तैयार नहीं हैं। 15 दिन पहले हड़ताल का नोटिस देने के बावजूद किसी अधिकारी ने वार्ता के लिए कदम नहीं उठाया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जनरल मैनेजर विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के फोन तक नहीं सुनते और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। प्रदर्शन के दिन भी वरिष्ठ अधिकारी के कथित रूप से अनुपस्थित रहने के कारण कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया।
किसानों और कृषि व्यवस्था पर संकट पैक्स कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें तुरंत पूरी नहीं की गईं, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा। कर्मचारियों ने बैंक का ताला लगाने और रिकवरी (ऋण वसूली) पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है। चूंकि वर्तमान में खेती का सीजन चल रहा है, ऐसे में खाद, बीज और दवाओं की आपूर्ति बाधित होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि दो दिनों में फैसला नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पूरे हरियाणा में फैल जाएगा और राज्य भर की रिकवरी रोक दी जाएगी।