समाज की रूढ़िवादी सोच और शारीरिक चुनौतियों को दरकिनार कर हरियाणा की एक महिला ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। रसीना गांव की रहने वाली सीमा आज ‘सुपर वुमेन’ के नाम से जानी जा रही हैं। सीमा न केवल घर के काम संभालती हैं, बल्कि बिजली फिटिंग, मोटर रिपेयरिंग और समर्सिबल लगाने जैसे तकनीकी कार्यों में भी माहिर हैं। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो तानों के डर से अपने सपनों को दबा देती हैं।
सीमा की जीवन यात्रा चुनौतियों से भरी रही है। वह एक किडनी पर जीवित हैं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति उनके काम के आड़े कभी नहीं आई। शादी के 13 साल बाद उन्होंने अपने पति, जिन्हें वह अपना गुरु मानती हैं, के साथ इस क्षेत्र में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने घर पर पंखे की वाइंडिंग सीखी और बाद में आईटीआई से अपना डिप्लोमा पूरा किया। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने गर्भावस्था की कठिनाइयों का भी सामना किया, लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
काम की शुरुआत में उन्हें सामाजिक विरोध का भी सामना करना पड़ा। जब उन्होंने समर्सिबल रिपेयरिंग और बिजली फिटिंग का काम शुरू किया, तो कई लोग दुकान पर आने से कतराने लगे। दुकान पर एक महिला को काम करते देख ग्राहकों की संख्या कम हो गई और उन्हें घर वापस भेजने तक की सलाह दी गई। हालांकि, सीमा ने हार नहीं मानी और अपने पति के अटूट सहयोग से खुद की पहचान बनाई। आज वह करनाल और आसपास के क्षेत्रों में कोठियों और इमारतों में बिजली की पूरी फिटिंग का काम संभाल रही हैं।
सीमा और उनके पति न केवल खुद काम कर रहे हैं, बल्कि समाज की अन्य बेटियों और महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रहे हैं। उनकी ‘मलिक समर्सिबल’ नाम की फर्म ने सरकारी आईटीआई के साथ मिलकर कई छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने एक विशेष योजना शुरू की है जिसके तहत वह महिलाओं को एक साल की मुफ्त ट्रेनिंग और आत्मनिर्भर बनने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान करती हैं।
सीमा का मानना है कि महिलाओं को घर पर खाली बैठने के बजाय कोई न कोई हुनर जरूर सीखना चाहिए। वह वर्तमान में रोजाना करीब 90 किलोमीटर का सफर तय कर अपने काम पर पहुंचती हैं और अपने छोटे बच्चे की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि मन में दृढ़ निश्चय हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए अभेद्य नहीं है।