January 9, 2026
29 Dec 15

वर्ष 2025 की विदाई और 2026 के आगमन की तैयारियों के बीच साइबर ठगों ने भी लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ करने के लिए अपनी नई रणनीतियां तैयार कर ली हैं। इन दिनों ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाला स्कैम देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करनाल सहित हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहाँ पढ़े-लिखे लोग भी इन ठगों के झांसे में आकर अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम की प्रक्रिया अत्यंत शातिराना होती है। इसमें पीड़ित को अचानक एक व्हाट्सएप या वीडियो कॉल आता है। फोन करने वाला व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी का सदस्य बताता है। वे पीड़ित को डराते हैं कि उसके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है या उसका मोबाइल नंबर किसी अपराध में शामिल है। बदनामी और कोर्ट-कचहरी के डर से पीड़ित घबरा जाता है। इसके बाद ठग उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर घंटों वीडियो कॉल पर बनाए रखते हैं और कैमरा बंद न करने की धमकी देते हैं। इस दौरान वे मानसिक दबाव बनाकर पीड़ित से उसके बैंक खाते की जानकारी और पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

सावधानी बरतने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि भारत के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान या शब्द नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को फोन कॉल पर गिरफ्तार नहीं कर सकती। गिरफ्तारी या थाने बुलाने के लिए पुलिस को बकायदा एक लिखित नोटिस भेजना होता है। ठग अक्सर आपकी मनोवैज्ञानिक कमजोरी और लोकलाज के डर का फायदा उठाते हैं।

नए साल में सुरक्षित रहने के लिए कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले, किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं और न ही किसी के साथ अपना ओटीपी, बैंक पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा करें। एनीडेस्क या टीमव्यूअर जैसी कोई भी रिमोट एक्सेस ऐप किसी के कहने पर डाउनलोड न करें। यदि कोई आपको वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने की धमकी देता है, तो बिना डरे तुरंत फोन काट दें। यदि आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है या आपको संदेह होता है, तो तुरंत भारत सरकार के हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर संपर्क करें या ‘cybercrime.gov.in’ पर शिकायत दर्ज करें। अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक बनें और अपने परिवार के बुजुर्गों व बच्चों को भी इस बारे में शिक्षित करें।

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