हरियाणा के करनाल में दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर प्रशासन और नहरी विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है, जो किसी भी समय एक बड़े और दर्दनाक सड़क हादसे का कारण बन सकती है। नेशनल हाईवे पर स्थित करण लेक के पास नहरी पुल की रेलिंग पिछले कई दिनों से टूटी पड़ी है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब रात के समय घना कोहरा छा जाता है और विजिबिलिटी शून्य के करीब पहुँच जाती है।
पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि यहाँ से गुजरने वाले वाहन चालकों, विशेषकर बाहरी राज्यों से आने वाले ड्राइवरों के लिए यह एक मौत का जाल बन चुका है। सड़क और फुटपाथ के बीच ऊँचाई का अंतर बहुत कम होने के कारण कोहरे में चालक को यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहाँ खत्म हो रही है। रेलिंग न होने की वजह से कोई भी अनियंत्रित वाहन सीधे गहरी नहर में गिर सकता है। रात के अंधेरे में पुल पर कोई चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि इस मार्ग पर नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पुराने पुल की सुरक्षा को इस तरह नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। जानकारों का मानना है कि जब तक नए पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक क्षतिग्रस्त हिस्से पर लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग या सीमेंटेड ब्लॉक लगाए जाने चाहिए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या नहरी विभाग और हाईवे पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही उनकी नींद टूटेगी।
इसके अलावा, हाईवे पर एक और बड़ी समस्या श्रद्धालुओं द्वारा पुल पर अचानक ब्रेक लगाने की है। अक्सर देखा जाता है कि लोग धार्मिक सामग्री, फूल या हवन सामग्री नहर में प्रवाहित करने के लिए हाईवे के बीचों-बीच गाड़ियाँ खड़ी कर देते हैं। कोहरे के मौसम में यह लापरवाही पीछे से आ रहे अन्य वाहनों के लिए विनाशकारी साबित होती है। पूर्व में भी ऐसे दर्जनों हादसे हो चुके हैं जहाँ नहरी पुल पर अचानक ब्रेक लगाने के कारण गाड़ियाँ आपस में टकराई हैं।
प्रशासन से पुरजोर अपील की जाती है कि जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल प्रभाव से पुल की मरम्मत करवाई जाए या वहाँ अस्थायी सुरक्षा घेरा बनाया जाए। साथ ही, वाहन चालकों को भी जागरूक रहने की आवश्यकता है कि वे हाईवे पर चलते हुए अचानक ब्रेक न लगाएं और अपनी तथा दूसरों की जान जोखिम में न डालें।