हरियाणा के करनाल जिले के कुटेल गांव की रहने वाली 4 साल की नन्हीं विरोनिका कल्याण इस समय जीवन और मृत्यु के बीच एक कठिन संघर्ष लड़ रही है। विरोनिका “थैलेसीमिया” जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी जान बचाने का एकमात्र रास्ता बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) है, जिसके लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल ने लगभग ₹30 लाख का खर्च बताया है। ऑपरेशन के बाद के 5-6 महीनों के उपचार और अन्य खर्चों को मिलाकर यह राशि करीब ₹40 लाख तक पहुँच सकती है।
विरोनिका का परिवार पहले ही गहरे संकटों से गुजर चुका है। विरोनिका जब मात्र 9 महीने की थी, तभी उसे इस बीमारी का पता चला। उससे कुछ समय पहले ही उसके पिता का एक संक्रमण के कारण निधन हो गया था। पिता के इलाज में परिवार की सारी जमा-पूंजी खर्च हो गई थी। अब विरोनिका की माँ, जो एक सिंगल मदर हैं, के कंधों पर अपनी दो बेटियों को पालने और छोटी बेटी की जान बचाने की दोहरी चुनौती है। घर में कोई अन्य कमाने वाला सदस्य न होने के कारण परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है।
राहत की बात यह है कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर मिल चुका है, लेकिन डोनर रजिस्ट्री और अस्पताल के भारी-भरकम खर्च ने परिवार के सामने दीवार खड़ी कर दी है। थैलेसीमिया से लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि डोनर रजिस्ट्री के लिए ही ₹8 लाख की आवश्यकता है। मार्च महीने में इस मासूम का ऑपरेशन प्लान किया गया है, ताकि तब तक आवश्यक धनराशि जुटाई जा सके और बच्ची का स्वास्थ्य भी स्थिर हो सके।
समाज के दानदाताओं, प्रवासी भारतीयों और सक्षम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस नन्हीं जान को बचाने के लिए आगे आएं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे मुख्यमंत्री या अन्य राहत कोष से इस परिवार की सहायता करें। विरोनिका की माँ ने रुंधे गले से कहा कि उनकी बेटियां ही उनके जीने का एकमात्र सहारा हैं और वे अपनी बेटी को ठीक देखना चाहती हैं। मानवता के नाते, इस परिवार को आपकी छोटी सी मदद एक नई जिंदगी दे सकती है।