हरियाणा जेल विभाग के महानिदेशक (डीजीपी) आलोक राय ने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में करनाल स्थित राज्य की एकमात्र जेल एकेडमी का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा किए गए क्रांतिकारी सुधारों, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के पुनर्वास के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य जेलों के भीतर से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।
गैंगस्टर कल्चर पर कड़ा प्रहार डीजीपी आलोक राय ने बताया कि उनके पदभार ग्रहण करने के समय जेलों से फिरौती और मोबाइल के जरिए आपराधिक गतिविधियां चलाना एक बड़ी चुनौती थी। इसे रोकने के लिए एक ठोस रणनीति के तहत लगभग 50 बड़े गैंगस्टरों का एक जेल से दूसरी जेल में तबादला किया गया, जिससे उनका स्थानीय नेटवर्क टूट गया। उन्होंने ‘भाई-जी’ कल्चर और सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों के महिमामंडन (ग्लोरिफिकेशन) को युवाओं के लिए घातक बताया। प्रशासन ने जेल नियमों को सख्ती से लागू करते हुए अब गैंगस्टरों से भी जेल परिसर में साफ-सफाई और रखरखाव का काम लेना शुरू कर दिया है।
पुनर्वास और शिक्षा की नई पहल जेलों को वास्तविक सुधार गृह बनाने की दिशा में हरियाणा ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। करनाल, पानीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम और रोहतक की जेलों में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थान स्थापित किए गए हैं। इन संस्थानों के माध्यम से कैदियों को औपचारिक डिग्री और वोकेशनल सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जो उन्हें रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद करेंगे। हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा इन पहलों का उद्घाटन किया जाना विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा, इग्नू और एनआईओएस के माध्यम से 700 से अधिक कैदी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
युवाओं के लिए चेतावनी और संदेश डीजीपी ने समाज के युवाओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अपराध का रास्ता केवल विनाश की ओर ले जाता है। जेलों के भीतर की स्थिति अत्यंत दयनीय होती है, जहाँ ब्रांडेड कपड़ों और ऐश-ओ-आराम के बजाय कैदी की वेशभूषा, सीमित भोजन और कठिन अनुशासन में रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मीडिया को जेलों का भ्रमण इसलिए कराया गया ताकि समाज को गैंगस्टरों की वास्तविक और कष्टपूर्ण स्थिति का पता चल सके और युवा इस रास्ते पर भटकने से बचें।
बुनियादी ढांचे का विस्तार प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या को हल करने के लिए विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। रेवाड़ी में नई जेल का काम पूरा हो चुका है, जबकि रोहतक में एक अत्याधुनिक हाई-सिक्योरिटी जेल का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके अतिरिक्त फतेहाबाद, पलवल और अंबाला में भी नई जेलों के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझते हुए सभी जेलों में काउंसलर नियुक्त किए गए हैं, जो विशेष रूप से उन कैदियों की सहायता करते हैं जो डिप्रेशन का शिकार हैं या किसी आकस्मिक अपराध के कारण जेल पहुंचे हैं।
अपने संबोधन के अंत में डीजीपी आलोक राय ने इन सफलताओं का श्रेय जेल विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया को दिया, जिन्होंने जेल सुधारों की सकारात्मक छवि को समाज तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।