करनाल: हरियाणा की बेटियाँ एक बार फिर खेल के मैदान में अपना दमखम दिखा रही हैं, और अब यह जुनून बॉक्सिंग के अखाड़े तक पहुँच गया है। करनाल के कर्ण स्टेडियम में भारी संख्या में लड़कियाँ बॉक्सिंग के लिए ज़ोरदार प्रशिक्षण ले रही हैं। इन युवा खिलाड़ियों में देश के लिए पदक जीतने का ज़बरदस्त उत्साह और जुनून दिखाई देता है।
एक कोच के अनुसार, करनाल में बॉक्सिंग के प्रति लड़कियों का रुझान बहुत अच्छा है। वर्तमान में यहाँ लगभग 40 से 45 लड़कियाँ नियमित रूप से प्रशिक्षण के लिए आती हैं। ये लड़कियाँ केवल शहर से नहीं, बल्कि 10 किलोमीटर, 15 किलोमीटर, और कुछ तो 20 किलोमीटर दूर के विभिन्न गाँवों से भी रोज़ाना सुबह और शाम दोनों समय अभ्यास के लिए आती हैं। वे दिन में कई-कई घंटे, लगभग 4 से 5 घंटे तक पसीना बहाती हैं।
प्रशिक्षण ले रहीं इन खिलाड़ियों का सबसे बड़ा सपना देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है। वे भारतीय खेलों के दिग्गजों को अपना आदर्श मानती हैं। खुशी नाम की एक छात्रा ने बताया कि वह पिछले चार साल से बॉक्सिंग कर रही है। उसने बॉक्सिंग को इसलिए चुना क्योंकि वह एक ‘सोलो गेम’ चाहती थी, जिसमें वह अपनी प्रतिभा को अच्छे से दिखा सके। खुशी अपनी प्रेरणा मैरी कॉम को मानती है और उनका लक्ष्य ओलंपिक में मेडल लाना है। खुशी ने बताया कि वह पहले ही सीबीएसई नेशनल में सिल्वर मेडल जीत चुकी है। तमन्ना, जो चिड़ाव गाँव से रोज़ाना 10 किलोमीटर का सफ़र तय करके आती है, ने बताया कि उसने पिछले साल कजाकिस्तान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। निकिता, जो भी चिड़ाव से ही आती है, ने बताया कि उनके लिए हर रोज़ 4 घंटे की कठोर ट्रेनिंग होती है, जिससे वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
युवा खिलाड़ियों की सफलता की कहानी यहीं नहीं रुकती। कोच ने बताया कि यहाँ कई बेटियाँ पहले भी एशियन चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक जैसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। उनका कहना है कि लड़कियों की प्रदर्शन क्षमता बहुत अच्छी है और वे दिन-प्रतिदिन बेहतर होती जा रही हैं।
बच्चों के प्रशिक्षण और उनके मानसिक मनोबल को बनाए रखने में कोच की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। कोच संदीप ने बताया कि वे खिलाड़ियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देते, बल्कि उन्हें एक अभिभावक की तरह समझते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि जब कोई खिलाड़ी असफल होकर निराश होता है, तो उसे समझाना और उसका मनोबल बढ़ाना कोच की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। वे खिलाड़ियों को दुनिया के उन महान एथलीटों की कहानियाँ सुनाते हैं जो असफलता के दौर से गुज़रने के बाद सफल हुए, ताकि उन्हें प्रेरणा मिल सके।
खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है। कोच ने बताया कि जल्द ही सीनियर स्टेट चैंपियनशिप होने वाली है, जिसके लिए खिलाड़ी पूरी मेहनत कर रहे हैं। इसके बाद नेशनल चैंपियनशिप, इंडिया कैंप, और फिर एशियन व कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी की जाएगी। यह स्पष्ट है कि करनाल का कर्ण स्टेडियम अब केवल एक अभ्यास स्थल नहीं, बल्कि देश के भविष्य के लिए बॉक्सिंग चैंपियनों की नर्सरी