- कुंजपुरा थाना के सब इंस्पेक्टर राजकुमार रिश्वत लेते गिरफ्तार, मां–बेटी ने लगाया टॉर्चर और पक्षपात का आरोप
- 35 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ़्तार
करनाल पुलिस की कुंजपुरा थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर राजकुमार को विजिलेंस टीम ने एक परिवार से लगभग 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वीडियो में दिखाया गया कि राजकुमार के खिलाफ यह कार्रवाई एक चल रहे विवादित मामले की जांच के दौरान की गई, जिसमें उन पर पहले से ही पक्षपात और दबाव डालने के आरोप लग रहे थे।
मां–बेटी का आरोप – हमसे भी मांगे थे 50 हजार रुपये
वीडियो में मौजूद नेहा अरोड़ा और उनकी मां ने दावा किया कि सब इंस्पेक्टर राजकुमार ने उनसे भी 50 हजार रुपये रिश्वत की डिमांड की थी। उनका कहना है कि राजकुमार ने कहा था कि यदि वे यह रकम दे दें तो वह दोनों पक्षों का “सेटलमेंट” करा कर उनके पिता और भाई को राहत दिलवा देगा।
जुए की शिकायत के बाद भाई पर हमला, फिर उल्टा केस
नेहा के अनुसार, उन्होंने 13 तारीख को क्षेत्र में चल रहे जुए के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके कुछ दिन बाद 16 तारीख को उनके भाई पर 14–15 लोगों ने हमला किया, जिसमें भाई को गंभीर चोटें आईं, जबकि बाद में उन्हीं के भाई और पिता पर 110 बीएनएस जैसी धारा लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया।
सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट कराने का गंभीर आरोप
नेहा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने हमले के समय की सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी पक्ष की दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करने की मांग की, तो जांच अधिकारी राजकुमार और सुशील कुमार ने ही सामने वाले पक्ष को फोन कर रिकॉर्डिंग डिलीट करने की सूचना दे दी। उनके मुताबिक, बीच के लगभग 20 दिन की फुटेज डिलीट कर दी गई, जबकि आगे–पीछे की रिकॉर्डिंग सही सलामत थी, जिससे उन्हें लग रहा है कि जानबूझकर सबूत मिटाए गए।
“अगर हम गलत होते तो कैमरे चेक कराने नहीं जाते”
नेहा ने बताया कि वह लगातार लगभग दो हफ्ते रोज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दौड़–भाग कर अलग-अलग घरों और दुकानों के कैमरे चेक करवाने की कोशिश करती रहीं। उनका कहना है कि जो परिवार दोषी होता, वह कभी भी खुद पुलिस से कैमरे चेक करने की मांग नहीं करता, जबकि यहां उल्टा उन्हें ही धक्के खाने पड़े और पुलिस ने उनके लाए सबूतों को नजरअंदाज कर दिया।
परिवार वालों की गिरफ्तारी, घायल होने के बावजूद जेल भेजे जाने का आरोप
नेहा ने बताया कि उनके पिता और भाई दोनों गंभीर रूप से घायल अवस्था में हैं – किसी के पैर में फ्रैक्चर है, तो किसी के हाथ में तलवार से लगी गहरी चोट और टांके हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उनके ऊपर ही नॉन–बेलेबल 110 बीएनएस की धारा लगाकर जेल भेज दिया, जबकि सामने वाले पक्ष के किसी भी व्यक्ति को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया।
मां की व्यथा – “मकान हड़पने और जुए में फंसाने का खेल”
पीड़ित मां ने आरोप लगाया कि दूसरी तरफ के लोग इलाके में जुआ खिलवाने का काम करते हैं और लोगों को जुए तथा पैसों के जाल में फंसाकर उनकी प्रॉपर्टी अपने नाम कराने की कोशिश करते हैं। उनका कहना है कि उनके पति भी इसी चक्कर में फंस गए थे, उन्हें बुरी तरह पीटा गया, हालत बिगड़ी और बाद में जेल भेज दिया गया, जबकि उन पर जुल्म करने वाले खुले घूम रहे हैं।
डर की वजह से घर छोड़ करनाल शहर में किराए पर रह रहे हैं
परिवार का कहना है कि उन्हें कुंजपुरा वापस जाने में लगातार डर महसूस होता है, इसलिए वे अपना घर–बार छोड़कर करनाल शहर में किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। एक मौके पर जब मां देव दिवाली पर केवल घर पर दिए जलाने और सफाई के लिए गईं, तो गुंडा तत्वों ने घर के बाहर खड़े होकर उन्हें गालियां और धमकियां दीं, जिसकी सीसीटीवी फुटेज उनके पास मौजूद होने का दावा किया गया, लेकिन पुलिस ने उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
112 पर 10 बार कॉल, फिर भी नहीं मिली मदद
नेहा ने बताया कि धमकी और गुंडागर्दी की उस घटना के दौरान उन्होंने 112 पर करीब 10 बार कॉल किया, जिसका कॉल रिकॉर्ड उनके फोन में सेव है। इसके बावजूद न तो मौके पर पुलिस पहुंची और न ही बाद में उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया, जिससे परिवार का सिस्टम पर भरोसा लगातार कमजोर होता गया।
मां–बेटी की गुहार – “या तो इंसाफ दो, या हमें खत्म कर दो”
भावुक होकर मां–बेटी ने बताया कि वे करनाल के एसपी, डीएसपी से कई बार मिल चुकी हैं और यहां तक कि डीजीपी व राजनीतिक नेताओं तक भी अपने मामले की शिकायत पहुंचा चुकी हैं। उनका कहना है कि अब वे थक चुकी हैं, बस इतना चाहती हैं कि निष्पक्ष जांच हो, उनके पिता और भाई को इंसाफ मिले, और अगर न्याय नहीं मिलना तो “या तो हमें मार दो या फिर हमें सच में न्याय दे दो, लेकिन कुंजपुरा अब हम नहीं जाएंगे।”
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद जगी इंसाफ की उम्मीद
परिवार का कहना है कि सब इंस्पेक्टर राजकुमार की विजिलेंस द्वारा रिश्वत लेते गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद उन्हें पहली बार लगा कि शायद अब उनकी आवाज सुनी जाएगी। मां ने दावा किया कि वह स्वयं थाने में मौजूद थीं, जब राजकुमार को एक चाय की दुकान के अंदर पैसे लेते हुए पकड़ा गया, और अब वह पुलिस के सीनियर अधिकारियों व डीजीपी से अपील कर रही हैं कि पूरे केस की वेरिफिकेशन कराकर उनके बेटा और पति को बाहर निकाला जाए।
मीडिया के ज़रिए इंसाफ की अपील
वीडियो के अंत में रिपोर्टर ने बताया कि अरोड़ा परिवार जैसी कई और फैमिलियां भी आगे आ रही हैं, जो इस सब इंस्पेक्टर पर मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान करने के आरोप लगा रही हैं। साथ ही करनाल व हरियाणा के लोगों से अपील की गई कि वे इस मामले को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि मां–बेटी की आवाज पुलिस के सीनियर अधिकारियों तक पहुंचे और उन्हें देर से ही सही, लेकिन न्याय मिल सके।