करनाल/जठपुरा (तरावड़ी रोड): करनाल के तरावड़ी रोड स्थित जठपुरा गांव के पास नहर पर बने खस्ता हाल पुल की टूटी रेलिंग और अंधेरे ने एक और किसान की जान को जोखिम में डाल दिया। खेतों से काम करके लौट रहे 38 वर्षीय किसान संजीव उर्फ टीटू का ट्रैक्टर रात में इस छोटे, संकरे पुल से गुजरते समय नहर में जा गिरा। ट्रैक्टर तो नहर किनारे फंस गया और उसे बाहर निकाल लिया गया, लेकिन किसान रातभर नहर में लापता रहा और गांव वालों ने अपने स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया।
टूटी रेलिंग, गुप अंधेरा और संकरा पुल
वीडियो में साफ दिखता है कि नहर पर बना पुल गांवों के लिए मुख्य आवागमन मार्ग है और कई गांवों को जोड़ता है। पुल की दोनों तरफ की दीवारें/रेलिंग टूटी हुई हैं और रास्ता बिल्कुल खुला पड़ा है, जिससे ज़रा सा संतुलन बिगड़ने पर कोई भी वाहन सीधा नहर में गिर सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, “ये नहर का पुल गांव में आने–जाने का रास्ता है, दीवार टूटी हुई है, एक भी लाइट नहीं जलती, सिंगल पुल है और बड़े–बड़े ट्रक यहां से निकलते हैं।” सर्दियों के दिनों और धुंध में यह खतरनाक स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
खेतों से लौटते समय हुआ हादसा
संजीव उर्फ टीटू, जठपुरा गांव का रहने वाला, रात को अपने खेत से काम करके ट्रैक्टर से वापस लौट रहा था। परिवारजन और ग्रामीण बताते हैं कि वह शादीशुदा है, “एक छोटा लड़का और दो लड़कियां” हैं, यानी घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। उसके चाचा/परिजन पीछे से मोटरसाइकिल पर आ रहे थे और बताते हैं कि “बस दो मिनट का फर्क था, वह ट्रैक्टर लेकर निकला और थोड़ी ही देर में खबर मिली कि ट्रैक्टर नहर में गिर गया है।”
एक ग्रामीण ने बताया, “ट्रैक्टर तो ऊपर लटक गया, किनारे फंस गया, लेकिन भाई (संजीव) नीचे डूब गया।” नहर में पानी काफी भरा हुआ है, पुल संकरा है और रेलिंग टूटी होने के कारण रात के अंधेरे में दिशा का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है।
“दुनिया भर के हादसे हो चुके हैं यहां” – ग्रामीणों का आरोप
गांव वालों ने पुल को “मौत का पुल” बताते हुए आरोप लगाया कि यहां पहले भी कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “पहले भी गाड़ियां यहां से गिर चुकी हैं, दुनिया भर के हादसे हो चुके हैं, दोनों साइड की रेलिंग गिर गई है, लाइट एक भी नहीं लगी, कोहरे के दिनों में तो और हादसे पड़ेंगे।”
एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि वे तो बस खेत में मशीन छोड़कर घर रोटी खाने गए थे, इतने में फोन आया कि “ट्रैक्टर नहर में गिर गया।” लोगों का कहना है कि नहरी विभाग और प्रशासन का ध्यान इस पुल की हालत पर बार–बार दिलाने के बावजूद न तो मरम्मत करवाई गई, न रेलिंग दोबारा लगाई गई, न ही लाइट की व्यवस्था की गई।
पूरी रात गांव वालों ने चलाया सर्च ऑपरेशन
हादसे के बाद पूरे जठपुरा गांव में मातम पसर गया और रात को 12 बजे के बाद भी नहर किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा रहे। वीडियो में दिखता है कि गांव वालों ने खुद जनरेटर सेट मंगवाया, बड़ी–बड़ी लाइटें लगवाईं और नहर किनारे चांदना करके सर्च ऑपरेशन चलाया।
गांव के तैराक/गोताखोर भी नहर में उतरकर संजीव को खोजने की कोशिश करते रहे। एक ग्रामीण ने बताया कि वे “मारखेड़े के पुल तक नीचे की तरफ जाकर तलाश कर आए हैं”, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला। सरकारी गोताखोरों के सुबह आने और आधिकारिक सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई।
“38 साल का जवान बेटा, तीन छोटे बच्चे, मां–बाप और पूरा परिवार सदमे में”
घटनास्थल पर मौजूद संजीव के परिजन, विशेषकर मां और अन्य रिश्तेदार, रो–रोकर बेसुध हालत में दिखाई दिए। मां ने बताया कि वह भी खेत पर ही थीं, “सातवा था जी, पीछे रहो, ट्रैक्टर लेकर आ रहा था, मैं पीछे बाइक से आ रही थी, बस दो मिनट का फर्क था।”
गांव वालों और परिवारजनों का कहना है कि 38 वर्षीय संजीव मेहनती किसान था, छोटे–छोटे बच्चों का पिता और परिवार का मुख्य सहारा था। अब उसकी नहर में गिरकर लापता होने की घटना ने पूरे परिवार पर “दुखों का पहाड़” तोड़ दिया है।
ग्रामीणों की मांग – नहरी विभाग और प्रशासन तुरंत जागे
ग्रामीणों ने नहरी विभाग और प्रशासन पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की कि:
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नहर पुल की टूटी रेलिंग तुरंत दुरुस्त की जाए।
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पुल को चौड़ा और मजबूत किया जाए, ताकि बड़े वाहनों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।
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पुल पर और आसपास पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं, खासकर सर्दी/धुंध के दिनों को ध्यान में रखते हुए।
अंत में यदि इस “मौत के पुल” पर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे हादसे आगे भी किसी और परिवार को उजाड़ सकते हैं।