January 12, 2026
18 Nov 9

करनाल/तरावड़ी: करनाल से करीब 15 किलोमीटर दूर तरावड़ी रोड स्थित जठपुरा गांव के नज़दीक नहर पर बने छोटे पुल पर नहरी विभाग की लापरवाही एक किसान की जान लेती दिख रही है। टूटी पड़ी नहर पुल की दीवार और गुप अंधेरे में सामने से आती गाड़ी की लाइट के कारण खेत से लौट रहा किसान ट्रैक्टर सहित नहर में गिर गया। ट्रैक्टर तो नहर के किनारे फंस गया और बाद में निकाल लिया गया, लेकिन किसान संजीव उर्फ टीटू का देर रात तक कोई पता नहीं चल पाया था।​

रात के अंधेरे में टूटी दीवार से नहर में गिरा ट्रैक्टर

घटना देर रात करीब साढ़े 12 बजे की बताई जा रही है, जब 38 वर्षीय किसान संजीव कुमार (उर्फ टीटू) खेत में काम करके ट्रैक्टर से लौट रहा था। परिजनों के अनुसार, उसके पिता/ताऊ पीछे से आ रहे थे, संजीव ने उन्हें कहा कि “मैं आगे चलता हूं, आप आ जाओ।” छोटा और कंडम हालत वाला यह सिंगल पुल कई गांवों और आसपास की 50 से अधिक सेलर/राइस मिलों को जोड़ता है, जहां से बड़े–बड़े वाहन गुजरते हैं।​

परिवार का कहना है कि सामने से किसी बड़े वाहन की तेज लाइट पड़ी, धुंध और अंधेरे के कारण पुल की टूटी हुई दीवार नज़र नहीं आई और ट्रैक्टर सीधा नहर में जा गिरा।​

“साल–डेढ़ साल से दीवार टूटी, हर साल हादसे” – गांव वालों का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने नहरी विभाग पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि नहर पुल की सुरक्षा दीवार “कम से कम साल–डेढ़ साल से टूटी पड़ी है।” एक परिजन ने कहा, “हम तो इतने बड़े हो गए, पूरी जिंदगी से यही देख रहे हैं, दीवार या तो टूटी है या कंडम हालत में है।”​

गांव वालों ने बताया कि इसी जगह पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि उनके परिवार का “बड़ा भाई भी पहले यहां से गिर चुका है” और कुछ समय पहले एक अनाथ (अनजान/अकेला व्यक्ति) भी इसी पुल से नहर में गिरा था, जिसकी बॉडी यहीं से बरामद हुई थी।​

गरीब परिवार, पीछे रह गए तीन छोटे बच्चे

संजीव उर्फ टीटू के बारे में परिजनों ने बताया कि वह लगभग 38 साल का था, दो बेटियां और एक बेटा है और “पूरे घर में वही अकेला कमाने वाला लड़का था।” परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है, जिससे यह हादसा और भी ज्यादा दर्दनाक हो गया है।​

पूरा गांव रात भर कर रहा है सर्च ऑपरेशन

घटना के बाद जठपुरा गांव और आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर अपने स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। बड़ी–बड़ी लाइटों की मदद से नहर के दोनों ओर और बहाव की दिशा में किसान की तलाश की जा रही थी। ट्रैक्टर को किनारे से निकाल लिया गया, लेकिन देर रात तक किसान का कोई सुराग नहीं मिला था।​

रिपोर्ट में दिखाई देता है कि पूरा गांव नहर किनारे जमा है और लोग पानी में उतरकर, टॉर्च और सर्च लाइट्स की मदद से लगातार खोज प्रयास कर रहे हैं।​

संकरी पुलिया, टूटी दीवार और भारी ट्रकों की आवाजाही से हमेशा बना रहता है खतरा

नहर पर बना यह पुल बहुत संकरा है, जहां से एक समय में मुश्किल से एक बड़ा वाहन सुरक्षित गुजर सकता है। वीडियो में साफ दिखाया गया कि धान की बोरियों से लदे ट्रक इसी कमजोर पुल से गुजरते हैं और जब एक बड़ा वाहन पुल पर होता है, तो सामने से आने वाले वाहन के लिए जगह ही नहीं बचती।​

ग्रामीणों का कहना है कि “हर रोज सर्दियों, धुंध और रात के समय यहां दुर्घटनाएं होती रहती हैं” और पुल की टूटी दीवार, बिना किसी चेतावनी–चिन्ह या रोशनी के, इस खतरे को और बढ़ा देती है।​

“तीन छोटे बच्चे छोड़ गया, प्रशासन अब भी सोया है”

परिजन और ग्रामीण इसे नहरी विभाग और प्रशासन की “सीधी–सीधी लापरवाही” करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि बार–बार हादसों और शिकायतों के बावजूद न तो दीवार की मरम्मत की गई, न पुल को चौड़ा किया गया और न ही रात को रोशनी की व्यवस्था की गई, जबकि यह पुल 50 से अधिक सेलर और 100–150 गांवों को जोड़ने वाला अहम मार्ग है।​

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब किसी छोटे से पुल की टूटी दीवार और खस्ता हालत के बारे में स्थानीय लोग वर्षों से बताते रहे हैं, तो समय रहते उसकी मरम्मत और सुरक्षा इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए।​

रातभर चल रहे सर्च के बीच गांव वालों और परिजनों की एक ही मांग है कि एक तरफ जहां लापता किसान को जल्द–से–जल्द खोजा जाए, वहीं दूसरी तरफ नहरी विभाग और प्रशासन इस पुल की तुरंत मरम्मत कराए, सुरक्षा ग्रिल/दीवार लगाए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोके जाने के लिए ठोस इंतज़ाम करे।

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