वर्तमान समय में आम जनता के लिए रसोई गैस सिलेंडर प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद, गैस एजेंसियों के बाहर सुबह के सूरज निकलने से पहले ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लोग सुबह 6 बजे से ही कतारों में लग जाते हैं, ताकि उन्हें समय पर गैस मिल सके, लेकिन कई घंटों के इंतजार के बाद भी सफलता हाथ नहीं लग रही है।
गैस वितरण की इस अव्यवस्था ने न केवल युवाओं बल्कि बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को भी सड़कों पर ला खड़ा किया है। लंबी-लंबी कतारों में खड़े लोगों का कहना है कि पहले गैस सिलेंडर की डिलीवरी घर-घर जाकर होती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। लोगों को खुद गैस एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्होंने 20 से 25 दिन पहले बुकिंग कराई थी, लेकिन फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा है। कतारों में लगे कुछ लोगों का यह तीसरा दिन है; वे पिछले दो दिनों से सुबह से शाम तक खड़े रहते हैं और स्टॉक खत्म होने की बात सुनकर खाली हाथ घर लौट जाते हैं।
मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीरें तब सामने आती हैं जब 60 से 80 वर्ष की आयु के बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग इस अव्यवस्था का शिकार होते हैं। एक कैंसर पीड़ित महिला उपभोक्ता ने बताया कि वह कई दिनों से परेशान हैं और मजबूरी में उन्हें खुद लाइन में लगना पड़ा है। कई बुजुर्ग महिलाएं जो चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं, वे अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना केवल इसलिए कतारों में खड़ी हैं क्योंकि घर में चूल्हा जलना जरूरी है। भीषण गर्मी के कारण कई लोगों के पैरों में सूजन आ गई है और वे भूख-प्यास से बेहाल हैं।
वितरण केंद्र पर मौजूद लोगों का आरोप है कि गाड़ियों के आने का कोई निश्चित समय नहीं है। कभी गाड़ी 12 बजे आती है तो कभी आती ही नहीं। जब गाड़ी आती भी है, तो भीड़ इतनी अधिक होती है कि अव्यवस्था फैल जाती है। हर कोई चाहता है कि उसे पहले सिलेंडर मिल जाए, जिससे वहां तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो जाती है। लोग अपने निजी वाहनों जैसे स्कूटी, बाइक और ई-रिक्शा पर खाली सिलेंडर लादकर घंटों इंतजार कर रहे हैं।
एजेंसी संचालकों का कहना है कि स्टॉक की कोई कमी नहीं है, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ने और पैनिक बुकिंग के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। हालांकि, धरातल पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि स्टॉक पर्याप्त है, तो उन्हें तीन-तीन दिन तक लाइनों में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है? वितरण प्रणाली की इस विफलता ने आम नागरिक के दैनिक जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।
प्रशासन और संबंधित विभागों को इस ओर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि समय रहते सुचारू वितरण प्रणाली और होम डिलीवरी सेवा को बहाल नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जनता का गुस्सा और अधिक बढ़ सकता है। वर्तमान में, रसोई गैस के लिए चल रही यह जद्दोजहद आम आदमी की सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है।