हरियाणा के करनाल जिले में मौसम के बदले मिजाज और बेमौसम बरसात ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। पिछले तीन-चार दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश और कुछ क्षेत्रों में हुई भीषण ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह बिछ गई है। किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी असहनीय है क्योंकि फसल पककर तैयार हो चुकी थी और अप्रैल के पहले सप्ताह से कटाई का कार्य शुरू होना था। लेकिन कुदरत की मार ने कटाई से ठीक पहले किसानों की साल भर की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
खेतों का जायजा लेने पर बर्बादी का खौफनाक मंजर साफ दिखाई देता है। जहाँ तक नजर जाती है, गेहूं की सुनहरी बालियां जमीन पर लेटी हुई नजर आती हैं। किसानों के अनुसार, खड़ी फसल के गिर जाने से दानों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उनमें नमी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाता है। गेहूं के अलावा, नकदी फसल के रूप में उगाई गई लहसुन की फसल में भी गलन और सड़न की समस्या शुरू हो गई है। पशुओं के लिए उगाई गई चारे की फसलें भी इस बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ गई हैं।
हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई क्षेत्रों में फसल 90 प्रतिशत तक बर्बाद हो चुकी है। प्रभावित किसानों ने रुंधे गले से अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे खेती पर ही पूरी तरह निर्भर हैं। कई किसानों ने 60 हजार से 80 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर ली थी। भारी लागत, खाद, बीज और दिन-रात की मेहनत के बाद जब मुनाफे का समय आया, तो प्रकृति ने सब कुछ छीन लिया। किसानों का कहना है कि अब फसल की कटाई में भी मशीनों का खर्च बढ़ जाएगा क्योंकि गिरी हुई फसल को काटने के लिए कंबाइन मशीन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है और डीजल की खपत भी दोगुनी हो जाती है।
कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के सामने अब भविष्य का अंधकार है। एक पीड़ित किसान ने बताया कि वे साहूकारों और बैंकों से ब्याज पर पैसे लेकर फसल पालते हैं, इस उम्मीद में कि फसल बिकने पर वे अपना कर्जा उतार पाएंगे और घर का खर्च चलाएंगे। लेकिन अब लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है। किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से हाथ जोड़कर विनती की है कि जल्द से जल्द विशेष गिरदावरी (फसल का मुआयना) करवाई जाए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह खराब बना रहा, तो बचे हुए उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में खेतों में पानी भरा होने के कारण मिट्टी में नमी का स्तर बहुत अधिक है, जो फसलों की जड़ों को कमजोर कर रहा है। किसानों का कहना है कि वे जन्म से यही काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसी बेबसी उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन न मिलने से किसानों में मायूसी और बढ़ गई है। फिलहाल, करनाल का किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है, इस प्रार्थना के साथ कि अब और बारिश न हो ताकि वे बची-खुची फसल को किसी तरह संभाल सकें।
Ground Report By Mukul Satija