- पुश्तैनी काम कर रहे 35 वर्षीय सुनील पर जटपुरा और चमारखेड़ा के बीच 10-15 युवकों ने किया हमला।
- पीड़ित परिवार का आरोप- कथित गोरक्षकों ने दी थी काम बंद करने की धमकी, अब जान लेने की कोशिश की।
- सुनील की छाती में चाकू और शरीर पर लाठियों के गंभीर निशान; ट्रोमा सेंटर में चल रहा है इलाज।
हरियाणा के करनाल जिले में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शहर के जटपुरा और चमारखेड़ा क्षेत्र के बीच अपना पुश्तैनी काम कर रहे एक युवक सुनील कुमार पर दिन-दहाड़े जानलेवा हमला किया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमलावर स्वयं को गोरक्षक बता रहे थे और उन्होंने सुनील को काम बंद न करने पर जिंदा जलाने की धमकी भी दी थी। वर्तमान में सुनील की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है और उसे करनाल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
मृतक पशु उठाने का कार्य करने वाले सुनील के परिजनों ने बताया कि उनका यह काम 100 साल से भी अधिक पुराना है। वे पूरे करनाल जिले में सड़क किनारे मरने वाले या गौशालाओं से आने वाले मृत पशुओं को उठाने का काम करते हैं। वे न केवल स्थानीय प्रशासन और डायल 112 के बुलावे पर पशुओं को हटाते हैं, बल्कि गौशाला संचालक भी उनसे संपर्क करते हैं। सुनील और उसका परिवार इन मृत पशुओं की खाल और हड्डियां अलग करने का कार्य करता है, जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। परिजनों के अनुसार, 18 मार्च की शाम को कुछ युवकों ने उन्हें काम करते समय रोका था और गाली-गलौज करते हुए धमकी दी थी कि यदि यह कार्य बंद नहीं किया गया, तो उन्हें अंजाम भुगतना होगा।
घटना वाले दिन यानी 19 मार्च को, सुनील अपने अन्य साथियों के साथ काचवा के नजदीक काम कर रहा था। उसी समय दो बाइकों और अन्य वाहनों पर सवार होकर 10 से 15 नकाबपोश युवक हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे। हमलावरों को देखते ही सुनील के साथी डर के मारे खेतों की ओर भाग निकले, लेकिन सुनील उनके चंगुल में फंस गया। आरोप है कि हमलावरों ने सुनील की छाती के पास चाकू से वार किया और उसे लाठियों व डंडों से बुरी तरह पीटा। हमले के बाद सुनील अचेत होकर गिर पड़ा और हमलावर मौके से फरार हो गए।
सुनील की पत्नी और परिवार की अन्य महिलाओं ने रुंधे गले से बताया कि सुनील ही उनके घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। उसकी शादी को 20 साल हो चुके हैं और उसके तीन छोटे बच्चे हैं। “हमारे बाप-दादा भी यही काम करते थे, हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं, फिर हमें क्यों निशाना बनाया जा रहा है?” यह सवाल सुनील की पत्नी प्रशासन से पूछ रही है। उनका कहना है कि हमलावरों ने उन पर जिंदा गाय काटने का झूठा आरोप लगाकर यह खूनी खेल खेला है, जबकि वे केवल मृत पशुओं को उठाने का वैध कार्य कर रहे थे।
सदर थाना पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और बाइक नंबरों के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि, पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे हमलावरों के नाम नहीं जानते, लेकिन उनके पास हमलावरों के वाहनों के नंबर मौजूद हैं। इस घटना ने क्षेत्र के दलित समुदाय और उन श्रमिकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है जो मृत पशुओं के निस्तारण के कार्य में लगे हुए हैं। परिवार ने मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें न्याय के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की जाए। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से जांच जारी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
Ground Report By Bhavya Narang