- PAK की पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, विधायक बोले- सेना प्रमुख को भी नॉमिनेट करें
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
जियो न्यूज के मुताबिक PML-N के विधायक राणा मुहम्मद अरशद ने प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के नेताओं की मध्यस्थता से ही अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हो पाया और इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का रास्ता तैयार हुआ।
8 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान से सीजफायर का ऐलान किया था। ट्रम्प ने बताया था कि उन्होंने यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया था। ईरान ने भी इसकी पुष्टि की थी।
पाकिस्तानी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रम्प से बातचीत कर 2 हफ्ते का समय मांगा, ताकि कूटनीतिक प्रयासों को मौका मिल सके। अमेरिकी पक्ष ने इसे स्वीकार किया। उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने अमेरिका और अन्य पक्षों से बातचीत लगातार जारी रखी और दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता था और अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता था। ऐसे में पाकिस्तान के नेतृत्व की कूटनीतिक पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाना चाहिए और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान ने क्यों दखल दिया?
अगर अमेरिका, ईरान पर बड़ा हमला करता तो पाकिस्तान पर भी मार पड़ती। दरअसल, पाकिस्तान-ईरान पड़ोसी हैं। पाकिस्तान को ईरानी शरणार्थियों का बोझ झेलना पड़ता। कमजोर माली हालत वाला पाकिस्तान हमले से पैदा होने वाले आर्थिक संकट को नहीं झेल सकता था। जंग के कारण पाकिस्तान में डीजल के दाम 500 पाकिस्तानी रुपए के पार हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया है। दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने के लिए कहा गया। अगर जंग बढ़ती तो पाकिस्तान की हालत बदतर हो जाती।
इसके अलावा अगर ईरान पर हमला होता तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करता, जिसके निशाने पर सऊदी अरब, यूएई, कतर जैसे देश भी होते। खास बात ये है कि अगर सऊदी पर बड़े हमले होते तो पाकिस्तान को भी जंग में शामिल होना पड़ता, क्योंकि उसने सऊदी के साथ एक डिफेंस पैक्ट साइन किया है। हालांकि, पाकिस्तान ऐसा करने से बचता, जैसा उसने पहले भी किया है।